Author: Premchand
Mansarovar-8(मानसरोवर भाग–8)
मानसरोवर भाग–8 प्रेमचंद की प्रतिनिधि कहानियों का ऐसा संग्रह है, जिसमें भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं, मानवीय संबंधों और नैतिक आदर्शों का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। इस भाग की कहानियाँ सामाजिक असमानता, गरीबी, शोषण, पारिवारिक जीवन, स्त्री की गरिमा, न्याय और मानवता जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। लेखक यह दिखाते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, परिश्रम, करुणा और आत्मसम्मान मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं। कहानियों के पात्र जीवन के संघर्षों से जूझते हुए मानवीय मूल्यों की महत्ता को सिद्ध करते हैं। प्रेमचंद अपनी सहज भाषा और गहरी सामाजिक दृष्टि के माध्यम से पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं। मानसरोवर भाग–8 भारतीय समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करते हुए सामाजिक समानता, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का संदेश देता है। यह संग्रह हिंदी कथा-साहित्य की अमूल्य धरोहर है और आज भी अपनी प्रासंगिकता एवं प्रेरणादायक स्वरूप के कारण व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।
Stock In
₹ 249.00
₹349
Inclusive of all taxes
ISBN : 9789393434357
-
1
Warranty
-
1 Guarantee
-
COD Avilable
-
Returnable
-
cancelable
Publication: Divyansh Publications
Description:
मानसरोवर भाग–8 प्रेमचंद की प्रतिनिधि कहानियों का ऐसा संग्रह है, जिसमें भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं, मानवीय संबंधों और नैतिक आदर्शों का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। इस भाग की कहानियाँ सामाजिक असमानता, गरीबी, शोषण, पारिवारिक जीवन, स्त्री की गरिमा, न्याय और मानवता जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। लेखक यह दिखाते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, परिश्रम, करुणा और आत्मसम्मान मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं। कहानियों के पात्र जीवन के संघर्षों से जूझते हुए मानवीय मूल्यों की महत्ता को सिद्ध करते हैं। प्रेमचंद अपनी सहज भाषा और गहरी सामाजिक दृष्टि के माध्यम से पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं। मानसरोवर भाग–8 भारतीय समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करते हुए सामाजिक समानता, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का संदेश देता है। यह संग्रह हिंदी कथा-साहित्य की अमूल्य धरोहर है और आज भी अपनी प्रासंगिकता एवं प्रेरणादायक स्वरूप के कारण व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।
Submit a Review
0 Review Of Product Mansarovar-8(मानसरोवर भाग–8)