Author: Premchand
Mansarovar - 3(मानसरोवर भाग–3)
मानसरोवर भाग–3 मुंशी प्रेमचंद की चुनिंदा कहानियों का ऐसा संग्रह है, जिसमें भारतीय समाज की वास्तविक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण मिलता है। इस भाग की कहानियाँ सामाजिक असमानता, गरीबी, पारिवारिक संबंधों, स्त्री की स्थिति, ईमानदारी, कर्तव्य और मानवीय करुणा जैसे विषयों को केंद्र में रखती हैं। प्रेमचंद अपने सरल, सहज और यथार्थवादी लेखन के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हैं तथा पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
इन कहानियों के पात्र सामान्य जनजीवन से जुड़े हुए हैं, जिनके संघर्ष, दुःख, आशाएँ और मानवीय भावनाएँ पाठक के मन को गहराई से स्पर्श करती हैं। लेखक यह संदेश देते हैं कि धन, पद या बाहरी वैभव से अधिक महत्त्वपूर्ण सत्य, न्याय, परिश्रम और मानवता के आदर्श हैं। उनकी कहानियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण और रूढ़ियों के विरुद्ध जागरूकता उत्पन्न करती हैं।
मानसरोवर भाग–3 भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज़ है, जो जीवन की जटिलताओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए नैतिकता, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है। यह संग्रह आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और पाठकों को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा प्रदान करता है।
Stock In
₹ 249.00
₹349
Inclusive of all taxes
ISBN : 9789393434951
-
1
Warranty
-
1 Guarantee
-
COD Avilable
-
Returnable
-
cancelable
Publication: Divyansh Publication
Description:
मानसरोवर भाग–3 मुंशी प्रेमचंद की चुनिंदा कहानियों का ऐसा संग्रह है, जिसमें भारतीय समाज की वास्तविक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण मिलता है। इस भाग की कहानियाँ सामाजिक असमानता, गरीबी, पारिवारिक संबंधों, स्त्री की स्थिति, ईमानदारी, कर्तव्य और मानवीय करुणा जैसे विषयों को केंद्र में रखती हैं। प्रेमचंद अपने सरल, सहज और यथार्थवादी लेखन के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हैं तथा पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
इन कहानियों के पात्र सामान्य जनजीवन से जुड़े हुए हैं, जिनके संघर्ष, दुःख, आशाएँ और मानवीय भावनाएँ पाठक के मन को गहराई से स्पर्श करती हैं। लेखक यह संदेश देते हैं कि धन, पद या बाहरी वैभव से अधिक महत्त्वपूर्ण सत्य, न्याय, परिश्रम और मानवता के आदर्श हैं। उनकी कहानियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण और रूढ़ियों के विरुद्ध जागरूकता उत्पन्न करती हैं।
मानसरोवर भाग–3 भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज़ है, जो जीवन की जटिलताओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए नैतिकता, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है। यह संग्रह आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और पाठकों को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा प्रदान करता है।
Submit a Review
0 Review Of Product Mansarovar - 3(मानसरोवर भाग–3)