Author: Premchand
Rangbhumi
रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक है। यह उपन्यास भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, औपनिवेशिक शासन और औद्योगीकरण के प्रभावों का गहन चित्रण प्रस्तुत करता है। इसका मुख्य पात्र सूरदास एक अंधा भिखारी है, जो अपनी छोटी-सी जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करता है। कुछ प्रभावशाली लोग उस भूमि पर कारखाना स्थापित करना चाहते हैं, जिससे गाँव के लोगों के जीवन और आजीविका पर संकट उत्पन्न हो जाता है।
सूरदास शारीरिक रूप से अंधा होने के बावजूद नैतिक दृष्टि से अत्यंत जागरूक और दृढ़ चरित्र का व्यक्ति है। वह अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होता है तथा सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करता है। प्रेमचंद ने उसके माध्यम से यह दिखाया है कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि नैतिक साहस और मानवीय मूल्यों में निहित होती है।
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Publication: Divyansh Publications
Description:
रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक है। यह उपन्यास भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, औपनिवेशिक शासन और औद्योगीकरण के प्रभावों का गहन चित्रण प्रस्तुत करता है। इसका मुख्य पात्र सूरदास एक अंधा भिखारी है, जो अपनी छोटी-सी जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करता है। कुछ प्रभावशाली लोग उस भूमि पर कारखाना स्थापित करना चाहते हैं, जिससे गाँव के लोगों के जीवन और आजीविका पर संकट उत्पन्न हो जाता है।
सूरदास शारीरिक रूप से अंधा होने के बावजूद नैतिक दृष्टि से अत्यंत जागरूक और दृढ़ चरित्र का व्यक्ति है। वह अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होता है तथा सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करता है। प्रेमचंद ने उसके माध्यम से यह दिखाया है कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि नैतिक साहस और मानवीय मूल्यों में निहित होती है।
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