Author: Premchand
Mansarovar-7(मानसरोवर भाग–7)
मानसरोवर भाग–7 में प्रेमचंद ने समाज के नैतिक, आर्थिक और मानवीय पक्षों को गहन संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। इस संग्रह की कहानियाँ अन्याय, शोषण, वर्गभेद, पारिवारिक संबंधों, स्त्री-जीवन और मानवीय संघर्षों को केंद्र में रखती हैं। लेखक पात्रों के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि जीवन में सत्य, न्याय, करुणा और ईमानदारी जैसे मूल्य ही स्थायी हैं। उनकी कहानियाँ समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए सामाजिक सुधार और मानवीय समानता का संदेश देती हैं। प्रेमचंद की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और यथार्थपरक है, जिससे पाठक पात्रों के सुख-दुःख से आत्मीय रूप से जुड़ जाते हैं। मानसरोवर भाग–7 केवल साहित्यिक आनंद ही नहीं देता, बल्कि पाठकों में सामाजिक चेतना, नैतिक सोच और मानवीय संवेदनाओं का भी विकास करता है। यह संग्रह प्रेमचंद की यथार्थवादी लेखन-शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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ISBN : 9789393434944
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Publication: Divyansh Publications
Description:
मानसरोवर भाग–7 में प्रेमचंद ने समाज के नैतिक, आर्थिक और मानवीय पक्षों को गहन संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। इस संग्रह की कहानियाँ अन्याय, शोषण, वर्गभेद, पारिवारिक संबंधों, स्त्री-जीवन और मानवीय संघर्षों को केंद्र में रखती हैं। लेखक पात्रों के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि जीवन में सत्य, न्याय, करुणा और ईमानदारी जैसे मूल्य ही स्थायी हैं। उनकी कहानियाँ समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए सामाजिक सुधार और मानवीय समानता का संदेश देती हैं। प्रेमचंद की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और यथार्थपरक है, जिससे पाठक पात्रों के सुख-दुःख से आत्मीय रूप से जुड़ जाते हैं। मानसरोवर भाग–7 केवल साहित्यिक आनंद ही नहीं देता, बल्कि पाठकों में सामाजिक चेतना, नैतिक सोच और मानवीय संवेदनाओं का भी विकास करता है। यह संग्रह प्रेमचंद की यथार्थवादी लेखन-शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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