Author: Premchand
Mansarovar-5(मानसरोवर भाग–5)
मानसरोवर भाग–5 में प्रेमचंद ने सामाजिक जीवन की जटिलताओं, आर्थिक विषमता, नैतिक संघर्ष और मानवीय रिश्तों का अत्यंत यथार्थवादी चित्रण किया है। संग्रह की कहानियाँ गरीबों, किसानों, मजदूरों, स्त्रियों तथा उपेक्षित वर्गों के जीवन को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं। लेखक समाज में फैली असमानता, अन्याय, लालच और रूढ़ियों की आलोचना करते हुए प्रेम, करुणा, त्याग और ईमानदारी जैसे मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित करते हैं। पात्र अपने संघर्षों के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों का सामना करते हुए आत्मसम्मान और नैतिकता का परिचय देते हैं। प्रेमचंद की सहज भाषा और प्रभावशाली कथाशैली पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। मानसरोवर भाग–5 समाज को अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण और संवेदनशील बनाने का संदेश देता है तथा पाठकों में सामाजिक चेतना और नैतिक दृष्टि का विकास करता है।
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ISBN : 9789393434838
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Publication: Divyansh Publications
Description:
मानसरोवर भाग–5 में प्रेमचंद ने सामाजिक जीवन की जटिलताओं, आर्थिक विषमता, नैतिक संघर्ष और मानवीय रिश्तों का अत्यंत यथार्थवादी चित्रण किया है। संग्रह की कहानियाँ गरीबों, किसानों, मजदूरों, स्त्रियों तथा उपेक्षित वर्गों के जीवन को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं। लेखक समाज में फैली असमानता, अन्याय, लालच और रूढ़ियों की आलोचना करते हुए प्रेम, करुणा, त्याग और ईमानदारी जैसे मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित करते हैं। पात्र अपने संघर्षों के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों का सामना करते हुए आत्मसम्मान और नैतिकता का परिचय देते हैं। प्रेमचंद की सहज भाषा और प्रभावशाली कथाशैली पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। मानसरोवर भाग–5 समाज को अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण और संवेदनशील बनाने का संदेश देता है तथा पाठकों में सामाजिक चेतना और नैतिक दृष्टि का विकास करता है।
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