Author: Premchand
Mansarovar-2(मानसरोवर भाग–2)
मानसरोवर भाग–2 में प्रेमचंद ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन, संघर्ष और मानवीय भावनाओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। इस संग्रह की कहानियाँ ग्रामीण परिवेश, आर्थिक विषमता, सामाजिक अन्याय, पारिवारिक संबंधों, स्त्री की स्थिति और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखती हैं। लेखक पात्रों के माध्यम से यह दिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, आत्मसम्मान और मानवता का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी कहानियाँ समाज में व्याप्त अंधविश्वास, शोषण और रूढ़ियों पर प्रहार करती हैं तथा समानता और न्याय की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। सरल भाषा और प्रभावशाली शैली पाठकों को कहानी के पात्रों के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ देती है। मानसरोवर भाग–2 केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय समाज की वास्तविकताओं और मानवीय मूल्यों का दर्पण है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।
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ISBN : 9789393434890
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Publication: Divyansh Publications
Description:
मानसरोवर भाग–2 में प्रेमचंद ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन, संघर्ष और मानवीय भावनाओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। इस संग्रह की कहानियाँ ग्रामीण परिवेश, आर्थिक विषमता, सामाजिक अन्याय, पारिवारिक संबंधों, स्त्री की स्थिति और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखती हैं। लेखक पात्रों के माध्यम से यह दिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, आत्मसम्मान और मानवता का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी कहानियाँ समाज में व्याप्त अंधविश्वास, शोषण और रूढ़ियों पर प्रहार करती हैं तथा समानता और न्याय की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। सरल भाषा और प्रभावशाली शैली पाठकों को कहानी के पात्रों के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ देती है। मानसरोवर भाग–2 केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय समाज की वास्तविकताओं और मानवीय मूल्यों का दर्पण है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।
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