Author: Rahul Sankrityayan
Volga Se Ganga(वोल्गा से गंगा)
'वोल्गा से गंगा' राहुल सांकृत्यायन की प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सामाजिक कृति है, जिसमें मानव सभ्यता और भारतीय समाज के विकास की एक लंबी यात्रा को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की कहानियाँ लगभग 6000 ईसा पूर्व से 1942 ईस्वी तक के कालखंड को समेटती हैं। लेखक ने मध्य एशिया और यूरोप से भारतीय उपमहाद्वीप तक मानव समुदायों के प्रवास, संघर्ष, सांस्कृतिक परिवर्तन और सामाजिक विकास को रोचक कहानियों के माध्यम से चित्रित किया है।
पुस्तक में अलग-अलग समय और परिस्थितियों से संबंधित बीस कहानियाँ हैं। प्रत्येक कहानी किसी विशेष ऐतिहासिक काल, समुदाय और सामाजिक परिवर्तन को सामने लाती है। इन कहानियों के पात्र काल्पनिक हैं, लेकिन उनके माध्यम से लेखक प्राचीन मानव जीवन, सामाजिक संरचनाओं और ऐतिहासिक परिस्थितियों को समझाने का प्रयास करते हैं।
कृति का आरंभ वोल्गा नदी के क्षेत्र से होता है, जहाँ प्रारंभिक मानव समुदाय प्रकृति पर निर्भर जीवन जीते हैं। धीरे-धीरे कृषि, पशुपालन, परिवार, सामाजिक संगठन और राजनीतिक संस्थाओं का विकास होता है। मानव समूह नए क्षेत्रों की ओर प्रवास करते हैं और उनके साथ भाषाएँ, परंपराएँ, धार्मिक विश्वास तथा सांस्कृतिक विचार भी आगे बढ़ते हैं। इसी क्रम में कथा भारतीय भूभाग तक पहुँचती है और भारतीय समाज में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों को प्रस्तुत करती है।
राहुल सांकृत्यायन ने पुस्तक में सामाजिक असमानता, वर्ग-व्यवस्था, धार्मिक रूढ़ियों, सामंतवाद और शोषण पर भी विचार किया है। वे दिखाते हैं कि समाज स्थिर नहीं होता, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों, तकनीकी विकास, संघर्ष और मानवीय चेतना के कारण लगातार बदलता रहता है। पुस्तक में श्रम, समानता और स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया है।
'वोल्गा से गंगा' केवल इतिहास का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के विकास की एक व्यापक कथा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कठिन ऐतिहासिक विषयों को रोचक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह कृति पाठकों को इतिहास को केवल राजाओं और युद्धों के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्य, समाज और सभ्यता के निरंतर विकास के रूप में समझने की दृष्टि प्रदान करती है।
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ISBN : 9789393434463
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Publication: Divyansh Publications
Description:
'वोल्गा से गंगा' राहुल सांकृत्यायन की प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सामाजिक कृति है, जिसमें मानव सभ्यता और भारतीय समाज के विकास की एक लंबी यात्रा को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की कहानियाँ लगभग 6000 ईसा पूर्व से 1942 ईस्वी तक के कालखंड को समेटती हैं। लेखक ने मध्य एशिया और यूरोप से भारतीय उपमहाद्वीप तक मानव समुदायों के प्रवास, संघर्ष, सांस्कृतिक परिवर्तन और सामाजिक विकास को रोचक कहानियों के माध्यम से चित्रित किया है।
पुस्तक में अलग-अलग समय और परिस्थितियों से संबंधित बीस कहानियाँ हैं। प्रत्येक कहानी किसी विशेष ऐतिहासिक काल, समुदाय और सामाजिक परिवर्तन को सामने लाती है। इन कहानियों के पात्र काल्पनिक हैं, लेकिन उनके माध्यम से लेखक प्राचीन मानव जीवन, सामाजिक संरचनाओं और ऐतिहासिक परिस्थितियों को समझाने का प्रयास करते हैं।
कृति का आरंभ वोल्गा नदी के क्षेत्र से होता है, जहाँ प्रारंभिक मानव समुदाय प्रकृति पर निर्भर जीवन जीते हैं। धीरे-धीरे कृषि, पशुपालन, परिवार, सामाजिक संगठन और राजनीतिक संस्थाओं का विकास होता है। मानव समूह नए क्षेत्रों की ओर प्रवास करते हैं और उनके साथ भाषाएँ, परंपराएँ, धार्मिक विश्वास तथा सांस्कृतिक विचार भी आगे बढ़ते हैं। इसी क्रम में कथा भारतीय भूभाग तक पहुँचती है और भारतीय समाज में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों को प्रस्तुत करती है।
राहुल सांकृत्यायन ने पुस्तक में सामाजिक असमानता, वर्ग-व्यवस्था, धार्मिक रूढ़ियों, सामंतवाद और शोषण पर भी विचार किया है। वे दिखाते हैं कि समाज स्थिर नहीं होता, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों, तकनीकी विकास, संघर्ष और मानवीय चेतना के कारण लगातार बदलता रहता है। पुस्तक में श्रम, समानता और स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया है।
'वोल्गा से गंगा' केवल इतिहास का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के विकास की एक व्यापक कथा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कठिन ऐतिहासिक विषयों को रोचक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह कृति पाठकों को इतिहास को केवल राजाओं और युद्धों के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्य, समाज और सभ्यता के निरंतर विकास के रूप में समझने की दृष्टि प्रदान करती है।
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