Author: Premchand
Sangram(संग्राम)
"संग्राम" Premchand का एक प्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक नाटक है। इस नाटक में ग्रामीण भारत की समस्याओं, जमींदारी व्यवस्था, किसानों के शोषण तथा न्याय और अन्याय के संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। प्रेमचंद ने यह दिखाया है कि जब सत्ता और धन का दुरुपयोग होता है, तब साधारण जनता को अनेक प्रकार के अत्याचार सहने पड़ते हैं।
नाटक में किसानों और गरीब वर्ग का जीवन अत्यंत कठिन बताया गया है। जमींदारों और प्रभावशाली लोगों के अत्याचार, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक असमानता के कारण ग्रामीण जनता निरंतर संघर्ष करती रहती है। कुछ जागरूक और साहसी पात्र अन्याय का विरोध करते हैं तथा सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए आगे आते हैं। संघर्ष के दौरान उन्हें अनेक कठिनाइयों, विरोध और त्याग का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे अपने आदर्शों से पीछे नहीं हटते।
प्रेमचंद ने इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज में स्थायी शांति और प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। अन्याय और शोषण के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करना ही सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है।
"संग्राम" का मुख्य संदेश यह है कि सत्य, न्याय, साहस और एकता के बल पर अन्याय पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यह नाटक सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जनकल्याण की भावना को प्रोत्साहित करने वाली प्रेमचंद की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।
"संग्राम" Premchand का एक प्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक नाटक है। इस नाटक में ग्रामीण भारत की समस्याओं, जमींदारी व्यवस्था, किसानों के शोषण तथा न्याय और अन्याय के संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। प्रेमचंद ने यह दिखाया है कि जब सत्ता और धन का दुरुपयोग होता है, तब साधारण जनता को अनेक प्रकार के अत्याचार सहने पड़ते हैं।
नाटक में किसानों और गरीब वर्ग का जीवन अत्यंत कठिन बताया गया है। जमींदारों और प्रभावशाली लोगों के अत्याचार, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक असमानता के कारण ग्रामीण जनता निरंतर संघर्ष करती रहती है। कुछ जागरूक और साहसी पात्र अन्याय का विरोध करते हैं तथा सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए आगे आते हैं। संघर्ष के दौरान उन्हें अनेक कठिनाइयों, विरोध और त्याग का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे अपने आदर्शों से पीछे नहीं हटते।
प्रेमचंद ने इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज में स्थायी शांति और प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। अन्याय और शोषण के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करना ही सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है।
"संग्राम" का मुख्य संदेश यह है कि सत्य, न्याय, साहस और एकता के बल पर अन्याय पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यह नाटक सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जनकल्याण की भावना को प्रोत्साहित करने वाली प्रेमचंद की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।
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ISBN : 978-81-996879-5-0
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Publication: Kitabking
Description:
"संग्राम" Premchand का एक प्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक नाटक है। इस नाटक में ग्रामीण भारत की समस्याओं, जमींदारी व्यवस्था, किसानों के शोषण तथा न्याय और अन्याय के संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। प्रेमचंद ने यह दिखाया है कि जब सत्ता और धन का दुरुपयोग होता है, तब साधारण जनता को अनेक प्रकार के अत्याचार सहने पड़ते हैं।
नाटक में किसानों और गरीब वर्ग का जीवन अत्यंत कठिन बताया गया है। जमींदारों और प्रभावशाली लोगों के अत्याचार, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक असमानता के कारण ग्रामीण जनता निरंतर संघर्ष करती रहती है। कुछ जागरूक और साहसी पात्र अन्याय का विरोध करते हैं तथा सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए आगे आते हैं। संघर्ष के दौरान उन्हें अनेक कठिनाइयों, विरोध और त्याग का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे अपने आदर्शों से पीछे नहीं हटते।
प्रेमचंद ने इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज में स्थायी शांति और प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। अन्याय और शोषण के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करना ही सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है।
"संग्राम" का मुख्य संदेश यह है कि सत्य, न्याय, साहस और एकता के बल पर अन्याय पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यह नाटक सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जनकल्याण की भावना को प्रोत्साहित करने वाली प्रेमचंद की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।
"संग्राम" Premchand का एक प्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक नाटक है। इस नाटक में ग्रामीण भारत की समस्याओं, जमींदारी व्यवस्था, किसानों के शोषण तथा न्याय और अन्याय के संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। प्रेमचंद ने यह दिखाया है कि जब सत्ता और धन का दुरुपयोग होता है, तब साधारण जनता को अनेक प्रकार के अत्याचार सहने पड़ते हैं।
नाटक में किसानों और गरीब वर्ग का जीवन अत्यंत कठिन बताया गया है। जमींदारों और प्रभावशाली लोगों के अत्याचार, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक असमानता के कारण ग्रामीण जनता निरंतर संघर्ष करती रहती है। कुछ जागरूक और साहसी पात्र अन्याय का विरोध करते हैं तथा सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए आगे आते हैं। संघर्ष के दौरान उन्हें अनेक कठिनाइयों, विरोध और त्याग का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे अपने आदर्शों से पीछे नहीं हटते।
प्रेमचंद ने इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज में स्थायी शांति और प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। अन्याय और शोषण के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करना ही सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है।
"संग्राम" का मुख्य संदेश यह है कि सत्य, न्याय, साहस और एकता के बल पर अन्याय पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यह नाटक सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जनकल्याण की भावना को प्रोत्साहित करने वाली प्रेमचंद की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।
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