Vish Vriksha(विष वृक्ष)

उपन्यास का मुख्य पात्र नगेन्द्र एक धनी और प्रतिष्ठित व्यक्ति है, जिसकी पत्नी सूर्यमुखी आदर्श, पतिव्रता और सहनशील स्त्री है। परिस्थितियों के कारण नगेन्द्र का आकर्षण कुंदनंदिनी नामक युवती की ओर हो जाता है। इस आकर्षण से उसके वैवाहिक जीवन में तनाव, ईर्ष्या, मानसिक संघर्ष और पारिवारिक विघटन उत्पन्न हो जाता है। धीरे-धीरे सभी पात्र अपने-अपने निर्णयों के परिणाम भुगतते हैं। अंततः उन्हें यह अनुभव होता है कि स्वार्थ, मोह और अनैतिक आकर्षण जीवन को विष के समान दुःखमय बना देते हैं।

उपन्यास में बंकिमचंद्र ने मानवीय मनोविज्ञान, स्त्री-पुरुष संबंधों और पारिवारिक मूल्यों का गहन विश्लेषण किया है। कथा का अंत पाठक को आत्मसंयम, कर्तव्य और नैतिक जीवन का महत्व समझाता है।

संदेश: विषवृक्ष का मूल संदेश है कि अनियंत्रित इच्छाएँ, स्वार्थ और नैतिक पतन व्यक्ति तथा परिवार के लिए विष के समान विनाशकारी होते हैं। प्रेम, विश्वास, आत्मसंयम, कर्तव्य और नैतिकता ही सुखी एवं संतुलित जीवन का आधार हैं।

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ISBN : 978-93-7670-049-3

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Publication: Kitabking
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उपन्यास का मुख्य पात्र नगेन्द्र एक धनी और प्रतिष्ठित व्यक्ति है, जिसकी पत्नी सूर्यमुखी आदर्श, पतिव्रता और सहनशील स्त्री है। परिस्थितियों के कारण नगेन्द्र का आकर्षण कुंदनंदिनी नामक युवती की ओर हो जाता है। इस आकर्षण से उसके वैवाहिक जीवन में तनाव, ईर्ष्या, मानसिक संघर्ष और पारिवारिक विघटन उत्पन्न हो जाता है। धीरे-धीरे सभी पात्र अपने-अपने निर्णयों के परिणाम भुगतते हैं। अंततः उन्हें यह अनुभव होता है कि स्वार्थ, मोह और अनैतिक आकर्षण जीवन को विष के समान दुःखमय बना देते हैं।

उपन्यास में बंकिमचंद्र ने मानवीय मनोविज्ञान, स्त्री-पुरुष संबंधों और पारिवारिक मूल्यों का गहन विश्लेषण किया है। कथा का अंत पाठक को आत्मसंयम, कर्तव्य और नैतिक जीवन का महत्व समझाता है।

संदेश: विषवृक्ष का मूल संदेश है कि अनियंत्रित इच्छाएँ, स्वार्थ और नैतिक पतन व्यक्ति तथा परिवार के लिए विष के समान विनाशकारी होते हैं। प्रेम, विश्वास, आत्मसंयम, कर्तव्य और नैतिकता ही सुखी एवं संतुलित जीवन का आधार हैं।

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Bankimchandra chattopadhyay

Bankim Chandra Chattopadhyay CIE (anglicised as Bankim Chandra Chatterjee; 26 June 1838[4] – 8 April 1894[5]) was a Bengali novelist, poet, essayist[6] and journalist.[7] He was the author of the 1882 Bengali language novel Anandamath, which is one of the landmarks of modern Bengali and Indian literature. He was the composer of Vande Mataram, written in highly Sanskritised Bengali, personifying India as a mother goddess.
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