Author: Premchand
Vardan(वरदान)
उपन्यास की कथा ऐसे पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है जो जीवन में प्रेम, पारिवारिक दायित्व और सामाजिक कर्तव्य के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं। परिस्थितियों के कारण उन्हें अनेक कठिनाइयों, गलतफहमियों और मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। प्रेमचंद ने दिखाया है कि सच्चा प्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें त्याग, धैर्य, विश्वास और जिम्मेदारी का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। पात्र अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के हित और समाज की भलाई को महत्व देते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का नैतिक पक्ष उभरकर सामने आता है।
उपन्यास में मानवीय संवेदना, करुणा, ईमानदारी और नैतिक आदर्शों को विशेष महत्व दिया गया है। कथा का अंत यह स्थापित करता है कि सत्य, सदाचार और निःस्वार्थ भावना अंततः जीवन को सार्थक बनाते हैं।
संदेश: वरदान का मूल संदेश है कि प्रेम, त्याग, कर्तव्य और नैतिकता ही जीवन के सबसे बड़े वरदान हैं। मनुष्य को स्वार्थ से ऊपर उठकर सत्य, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि यही गुण व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण करते हैं।
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ISBN : 978-81-996879-2-9
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Publication: Kitabking
Description:
उपन्यास की कथा ऐसे पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है जो जीवन में प्रेम, पारिवारिक दायित्व और सामाजिक कर्तव्य के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं। परिस्थितियों के कारण उन्हें अनेक कठिनाइयों, गलतफहमियों और मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। प्रेमचंद ने दिखाया है कि सच्चा प्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें त्याग, धैर्य, विश्वास और जिम्मेदारी का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। पात्र अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के हित और समाज की भलाई को महत्व देते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का नैतिक पक्ष उभरकर सामने आता है।
उपन्यास में मानवीय संवेदना, करुणा, ईमानदारी और नैतिक आदर्शों को विशेष महत्व दिया गया है। कथा का अंत यह स्थापित करता है कि सत्य, सदाचार और निःस्वार्थ भावना अंततः जीवन को सार्थक बनाते हैं।
संदेश: वरदान का मूल संदेश है कि प्रेम, त्याग, कर्तव्य और नैतिकता ही जीवन के सबसे बड़े वरदान हैं। मनुष्य को स्वार्थ से ऊपर उठकर सत्य, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि यही गुण व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण करते हैं।
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