Vaishali Ki Nagarvadhu(वैशाली की नगरवधु)

'वैशाली की नगरवधू' आचार्य चतुरसेन की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है, जिसमें प्राचीन भारत के वैशाली गणराज्य, उसके सामाजिक-राजनीतिक जीवन और प्रसिद्ध नगरवधू आम्रपाली के जीवन को केंद्र में रखा गया है। उपन्यास इतिहास, प्रेम, राजनीति, युद्ध, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली मिश्रण प्रस्तुत करता है।

कथा की प्रमुख पात्र आम्रपाली अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली युवती है। उसकी असाधारण सुंदरता के कारण वैशाली के गणमान्य लोग उसे नगरवधू घोषित कर देते हैं। यह पद बाहर से सम्मानजनक दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे एक स्त्री की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भावनाओं का गहरा संघर्ष छिपा है। आम्रपाली के जीवन में प्रेम, प्रतिष्ठा, सामाजिक अपेक्षाएँ और व्यक्तिगत इच्छाएँ लगातार टकराती रहती हैं।

उपन्यास में वैशाली के लिच्छवि गणराज्य की राजनीतिक व्यवस्था, उसके वैभव और आंतरिक संघर्षों का भी विस्तृत चित्रण मिलता है। मगध और वैशाली के बीच राजनीतिक तनाव तथा सत्ता की महत्वाकांक्षाएँ कथा को रोमांचक बनाती हैं। लेखक ने युद्ध और राजनीति के साथ-साथ उस समय के सामाजिक जीवन, संस्कृति, धर्म और स्त्री की स्थिति को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

आम्रपाली का चरित्र इस उपन्यास का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। वह केवल सौंदर्य की प्रतीक नहीं, बल्कि स्वाभिमान, संवेदना, बुद्धिमत्ता और आत्मिक परिवर्तन की प्रतीक बनकर सामने आती है। उसके जीवन में भगवान बुद्ध का प्रवेश एक महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। सांसारिक आकर्षण, वैभव और सामाजिक पहचान से आगे बढ़कर वह आध्यात्मिक शांति और मुक्ति की ओर आकर्षित होती है।

'वैशाली की नगरवधू' केवल आम्रपाली की कथा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय समाज में स्त्री की स्वतंत्रता, सत्ता, प्रेम, त्याग और आध्यात्मिक चेतना के प्रश्नों को भी सामने लाती है। आचार्य चतुरसेन ने इतिहास और कल्पना का सुंदर समन्वय करते हुए ऐसा कथानक रचा है, जो पाठकों को प्राचीन भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से परिचित कराने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करता है।

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ISBN : 9789389245301

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Publication: Divyansh Publications
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'वैशाली की नगरवधू' आचार्य चतुरसेन की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है, जिसमें प्राचीन भारत के वैशाली गणराज्य, उसके सामाजिक-राजनीतिक जीवन और प्रसिद्ध नगरवधू आम्रपाली के जीवन को केंद्र में रखा गया है। उपन्यास इतिहास, प्रेम, राजनीति, युद्ध, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली मिश्रण प्रस्तुत करता है।

कथा की प्रमुख पात्र आम्रपाली अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली युवती है। उसकी असाधारण सुंदरता के कारण वैशाली के गणमान्य लोग उसे नगरवधू घोषित कर देते हैं। यह पद बाहर से सम्मानजनक दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे एक स्त्री की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भावनाओं का गहरा संघर्ष छिपा है। आम्रपाली के जीवन में प्रेम, प्रतिष्ठा, सामाजिक अपेक्षाएँ और व्यक्तिगत इच्छाएँ लगातार टकराती रहती हैं।

उपन्यास में वैशाली के लिच्छवि गणराज्य की राजनीतिक व्यवस्था, उसके वैभव और आंतरिक संघर्षों का भी विस्तृत चित्रण मिलता है। मगध और वैशाली के बीच राजनीतिक तनाव तथा सत्ता की महत्वाकांक्षाएँ कथा को रोमांचक बनाती हैं। लेखक ने युद्ध और राजनीति के साथ-साथ उस समय के सामाजिक जीवन, संस्कृति, धर्म और स्त्री की स्थिति को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

आम्रपाली का चरित्र इस उपन्यास का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। वह केवल सौंदर्य की प्रतीक नहीं, बल्कि स्वाभिमान, संवेदना, बुद्धिमत्ता और आत्मिक परिवर्तन की प्रतीक बनकर सामने आती है। उसके जीवन में भगवान बुद्ध का प्रवेश एक महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। सांसारिक आकर्षण, वैभव और सामाजिक पहचान से आगे बढ़कर वह आध्यात्मिक शांति और मुक्ति की ओर आकर्षित होती है।

'वैशाली की नगरवधू' केवल आम्रपाली की कथा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय समाज में स्त्री की स्वतंत्रता, सत्ता, प्रेम, त्याग और आध्यात्मिक चेतना के प्रश्नों को भी सामने लाती है। आचार्य चतुरसेन ने इतिहास और कल्पना का सुंदर समन्वय करते हुए ऐसा कथानक रचा है, जो पाठकों को प्राचीन भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से परिचित कराने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करता है।

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