Author: Rahul Sankrityayan
Tumhari Kshay(तुम्हारी क्षय)
"तुम्हारी क्षय" Rahul Sankrityayan का एक विचारोत्तेजक सामाजिक उपन्यास है। इस कृति में लेखक ने मानव जीवन, सामाजिक विषमताओं, रूढ़िवाद, अंधविश्वास तथा अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं की तीखी आलोचना की है। राहुल सांकृत्यायन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता और मानवीय मूल्यों के समर्थक थे, और इस उपन्यास में भी यही विचार प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
उपन्यास का मूल कथ्य यह है कि समाज की वास्तविक "क्षय" (पतन) किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन पुरानी और जड़ हो चुकी सामाजिक मान्यताओं की होनी चाहिए जो मनुष्य की स्वतंत्रता, समानता और विकास में बाधक हैं। कहानी के पात्र संघर्ष, अनुभव और विचारों के माध्यम से यह समझते हैं कि अज्ञान, रूढ़ियाँ, शोषण और असमानता समाज को कमजोर बनाते हैं। लेखक शिक्षा, विवेक, परिश्रम और सामाजिक चेतना को प्रगति का आधार मानते हैं।
राहुल सांकृत्यायन ने उपन्यास में यह संदेश दिया है कि मनुष्य को तर्क, विज्ञान और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए तथा अन्याय और अंधविश्वास का साहसपूर्वक विरोध करना चाहिए। समाज का विकास तभी संभव है जब सभी लोगों को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले।
"तुम्हारी क्षय" का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा परिवर्तन पुराने अन्यायपूर्ण विचारों और कुरीतियों के अंत से ही संभव है। यह कृति सामाजिक जागरूकता, प्रगतिशील सोच और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने वाली प्रेरणादायक रचना है।
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ISBN : 978-93-7670-447-7
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Publication: Kitabking
Description:
"तुम्हारी क्षय" Rahul Sankrityayan का एक विचारोत्तेजक सामाजिक उपन्यास है। इस कृति में लेखक ने मानव जीवन, सामाजिक विषमताओं, रूढ़िवाद, अंधविश्वास तथा अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं की तीखी आलोचना की है। राहुल सांकृत्यायन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता और मानवीय मूल्यों के समर्थक थे, और इस उपन्यास में भी यही विचार प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
उपन्यास का मूल कथ्य यह है कि समाज की वास्तविक "क्षय" (पतन) किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन पुरानी और जड़ हो चुकी सामाजिक मान्यताओं की होनी चाहिए जो मनुष्य की स्वतंत्रता, समानता और विकास में बाधक हैं। कहानी के पात्र संघर्ष, अनुभव और विचारों के माध्यम से यह समझते हैं कि अज्ञान, रूढ़ियाँ, शोषण और असमानता समाज को कमजोर बनाते हैं। लेखक शिक्षा, विवेक, परिश्रम और सामाजिक चेतना को प्रगति का आधार मानते हैं।
राहुल सांकृत्यायन ने उपन्यास में यह संदेश दिया है कि मनुष्य को तर्क, विज्ञान और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए तथा अन्याय और अंधविश्वास का साहसपूर्वक विरोध करना चाहिए। समाज का विकास तभी संभव है जब सभी लोगों को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले।
"तुम्हारी क्षय" का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा परिवर्तन पुराने अन्यायपूर्ण विचारों और कुरीतियों के अंत से ही संभव है। यह कृति सामाजिक जागरूकता, प्रगतिशील सोच और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने वाली प्रेरणादायक रचना है।
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