Author: William Shakespear
Til ka Taad(तिल का ताड़)
कहानी में दो प्रेम कथाएँ समानांतर रूप से चलती हैं। पहली कथा क्लॉडियो और हीरो के प्रेम की है, जिनका विवाह षड्यंत्र और झूठे आरोपों के कारण संकट में पड़ जाता है। दूसरी ओर बेनेडिक और बीट्रिस एक-दूसरे से तर्क-वितर्क करते रहते हैं और प्रेम का विरोध करते दिखाई देते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ धीरे-धीरे उन्हें एक-दूसरे के निकट ले आती हैं।
कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब एक षड्यंत्रकारी हीरो के चरित्र पर झूठा आरोप लगाकर विवाह रुकवा देता है। बाद में सच्चाई सामने आती है, षड्यंत्र का पर्दाफाश होता है और सभी गलतफहमियाँ दूर हो जाती हैं। अंततः हीरो और क्लॉडियो का पुनर्मिलन होता है तथा बेनेडिक और बीट्रिस भी अपने प्रेम को स्वीकार कर लेते हैं। इस प्रकार नाटक का समापन सुखद वातावरण में होता है।
संदेश: यह नाटक सिखाता है कि बिना सत्य जाने किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए। विश्वास, संवाद और धैर्य से गलतफहमियाँ दूर की जा सकती हैं। प्रेम और सत्य अंततः असत्य, छल और संदेह पर विजय प्राप्त करते हैं।
Stock In
₹ 200.00
₹249
Inclusive of all taxes
ISBN : 978-93-7670-467-5
-
1
Warranty
-
1 Guarantee
-
COD Avilable
-
Returnable
-
cancelable
Publication: Kitabking
Description:
कहानी में दो प्रेम कथाएँ समानांतर रूप से चलती हैं। पहली कथा क्लॉडियो और हीरो के प्रेम की है, जिनका विवाह षड्यंत्र और झूठे आरोपों के कारण संकट में पड़ जाता है। दूसरी ओर बेनेडिक और बीट्रिस एक-दूसरे से तर्क-वितर्क करते रहते हैं और प्रेम का विरोध करते दिखाई देते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ धीरे-धीरे उन्हें एक-दूसरे के निकट ले आती हैं।
कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब एक षड्यंत्रकारी हीरो के चरित्र पर झूठा आरोप लगाकर विवाह रुकवा देता है। बाद में सच्चाई सामने आती है, षड्यंत्र का पर्दाफाश होता है और सभी गलतफहमियाँ दूर हो जाती हैं। अंततः हीरो और क्लॉडियो का पुनर्मिलन होता है तथा बेनेडिक और बीट्रिस भी अपने प्रेम को स्वीकार कर लेते हैं। इस प्रकार नाटक का समापन सुखद वातावरण में होता है।
संदेश: यह नाटक सिखाता है कि बिना सत्य जाने किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए। विश्वास, संवाद और धैर्य से गलतफहमियाँ दूर की जा सकती हैं। प्रेम और सत्य अंततः असत्य, छल और संदेह पर विजय प्राप्त करते हैं।
Submit a Review
0 Review Of Product Til ka Taad(तिल का ताड़)