Author: Rahul Sankrityayan
Teen Natak(तीन नाटक)
"तीन नाटक" Rahul Sankrityayan का भोजपुरी भाषा में लिखा गया एक महत्वपूर्ण नाट्य-संग्रह है। इसमें तीन नाटक—"मेहरारून के दुरदसा", "नइकी दुनिया" और "जोंक"—संकलित हैं। इन तीनों नाटकों के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त शोषण, गरीबी, स्त्री-असमानता, अशिक्षा और आर्थिक विषमता जैसी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
"मेहरारून के दुरदसा" में ग्रामीण महिलाओं की दयनीय स्थिति, लड़कियों के प्रति भेदभाव, घरेलू उत्पीड़न तथा अशिक्षा के कारण होने वाले अन्याय का मार्मिक चित्रण किया गया है। "नइकी दुनिया" में लेखक एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ आर्थिक समानता, श्रमिकों और किसानों का सम्मान तथा सामाजिक न्याय स्थापित हो। वहीं "जोंक" में पूँजीवादी शोषण की तुलना जोंक से की गई है, जो गरीबों का रक्त चूसती है। इस नाटक के माध्यम से किसानों और मजदूरों के आर्थिक उत्थान तथा शोषण-मुक्त समाज की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
इस संग्रह का मुख्य संदेश यह है कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब स्त्री-पुरुष समानता, सामाजिक न्याय, श्रम का सम्मान और आर्थिक समानता को बढ़ावा दिया जाए। राहुल सांकृत्यायन ने इन नाटकों के माध्यम से रूढ़ियों, शोषण और अन्याय का विरोध करते हुए एक जागरूक, समानतापूर्ण और मानवीय समाज की स्थापना का आह्वान किया है। इसलिए "तीन नाटक" केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जन-जागरण का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज़ है।
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ISBN : 978-93-7670-660-0
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Publication: Kitabking
Description:
"तीन नाटक" Rahul Sankrityayan का भोजपुरी भाषा में लिखा गया एक महत्वपूर्ण नाट्य-संग्रह है। इसमें तीन नाटक—"मेहरारून के दुरदसा", "नइकी दुनिया" और "जोंक"—संकलित हैं। इन तीनों नाटकों के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त शोषण, गरीबी, स्त्री-असमानता, अशिक्षा और आर्थिक विषमता जैसी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
"मेहरारून के दुरदसा" में ग्रामीण महिलाओं की दयनीय स्थिति, लड़कियों के प्रति भेदभाव, घरेलू उत्पीड़न तथा अशिक्षा के कारण होने वाले अन्याय का मार्मिक चित्रण किया गया है। "नइकी दुनिया" में लेखक एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ आर्थिक समानता, श्रमिकों और किसानों का सम्मान तथा सामाजिक न्याय स्थापित हो। वहीं "जोंक" में पूँजीवादी शोषण की तुलना जोंक से की गई है, जो गरीबों का रक्त चूसती है। इस नाटक के माध्यम से किसानों और मजदूरों के आर्थिक उत्थान तथा शोषण-मुक्त समाज की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
इस संग्रह का मुख्य संदेश यह है कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब स्त्री-पुरुष समानता, सामाजिक न्याय, श्रम का सम्मान और आर्थिक समानता को बढ़ावा दिया जाए। राहुल सांकृत्यायन ने इन नाटकों के माध्यम से रूढ़ियों, शोषण और अन्याय का विरोध करते हुए एक जागरूक, समानतापूर्ण और मानवीय समाज की स्थापना का आह्वान किया है। इसलिए "तीन नाटक" केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जन-जागरण का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज़ है।
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