Author: Sarat Chandra Chattopadhyay
Srikanth(श्रीकांत)
श्रीकांत’ शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें मुख्य पात्र श्रीकांत के जीवन, यात्राओं, अनुभवों और आत्म-अन्वेषण की कहानी प्रस्तुत की गई है। श्रीकांत एक स्वतंत्र स्वभाव का घुमक्कड़ व्यक्ति है, जो जीवन के विभिन्न पड़ावों पर अनेक लोगों और परिस्थितियों से मिलता है। उसकी यात्राएँ केवल स्थानों की यात्रा नहीं हैं, बल्कि जीवन, प्रेम, समाज और मनुष्य के स्वभाव को समझने की यात्रा भी हैं। उपन्यास चार खंडों में पूर्ण होता है और इसमें विभिन्न समय तथा स्थानों से जुड़ी अनेक घटनाएँ और पात्र आते हैं।
श्रीकांत के जीवन में इंद्रनाथ, अन्नदादिदी, राजलक्ष्मी, अभया और कमललता जैसे पात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन पात्रों के माध्यम से लेखक ने प्रेम, त्याग, स्वतंत्रता, सामाजिक बंधनों और मानवीय संबंधों के अनेक रूपों को सामने रखा है। विशेष रूप से राजलक्ष्मी और अभया जैसे स्त्री पात्र उस समय के सामाजिक नियमों और स्त्रियों की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं। राजलक्ष्मी का श्रीकांत के साथ संबंध प्रेम, लगाव और सामाजिक मर्यादाओं के बीच संघर्ष को दर्शाता है, जबकि अभया अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का साहस दिखाती है।
उपन्यास का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि श्रीकांत स्वयं जीवन को दूर से देखने और अनुभवों से सीखने वाला व्यक्ति है। वह निश्चित सामाजिक मान्यताओं में बंधने के बजाय लगातार नए अनुभवों की ओर बढ़ता है। उसके सामने आने वाले लोग और घटनाएँ उसके विचारों को बदलते और जीवन के प्रति उसकी समझ को गहरा करते हैं।
‘श्रीकांत’ का मूल संदेश यह है कि जीवन को केवल सामाजिक नियमों और रूढ़ियों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। प्रेम, स्वतंत्रता, मानवीय संवेदना और आत्म-अनुभव मनुष्य के जीवन को वास्तविक अर्थ प्रदान करते हैं। यह उपन्यास व्यक्ति और समाज के संबंधों, मानवीय भावनाओं तथा जीवन की निरंतर खोज को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करता है।
Stock In
₹ 320.00
₹399
Inclusive of all taxes
ISBN : 9789389245899
-
1
Warranty
-
1 Guarantee
-
COD Avilable
-
Returnable
-
cancelable
Publication: Divyansh Publication
Description:
श्रीकांत’ शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें मुख्य पात्र श्रीकांत के जीवन, यात्राओं, अनुभवों और आत्म-अन्वेषण की कहानी प्रस्तुत की गई है। श्रीकांत एक स्वतंत्र स्वभाव का घुमक्कड़ व्यक्ति है, जो जीवन के विभिन्न पड़ावों पर अनेक लोगों और परिस्थितियों से मिलता है। उसकी यात्राएँ केवल स्थानों की यात्रा नहीं हैं, बल्कि जीवन, प्रेम, समाज और मनुष्य के स्वभाव को समझने की यात्रा भी हैं। उपन्यास चार खंडों में पूर्ण होता है और इसमें विभिन्न समय तथा स्थानों से जुड़ी अनेक घटनाएँ और पात्र आते हैं।
श्रीकांत के जीवन में इंद्रनाथ, अन्नदादिदी, राजलक्ष्मी, अभया और कमललता जैसे पात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन पात्रों के माध्यम से लेखक ने प्रेम, त्याग, स्वतंत्रता, सामाजिक बंधनों और मानवीय संबंधों के अनेक रूपों को सामने रखा है। विशेष रूप से राजलक्ष्मी और अभया जैसे स्त्री पात्र उस समय के सामाजिक नियमों और स्त्रियों की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं। राजलक्ष्मी का श्रीकांत के साथ संबंध प्रेम, लगाव और सामाजिक मर्यादाओं के बीच संघर्ष को दर्शाता है, जबकि अभया अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का साहस दिखाती है।
उपन्यास का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि श्रीकांत स्वयं जीवन को दूर से देखने और अनुभवों से सीखने वाला व्यक्ति है। वह निश्चित सामाजिक मान्यताओं में बंधने के बजाय लगातार नए अनुभवों की ओर बढ़ता है। उसके सामने आने वाले लोग और घटनाएँ उसके विचारों को बदलते और जीवन के प्रति उसकी समझ को गहरा करते हैं।
‘श्रीकांत’ का मूल संदेश यह है कि जीवन को केवल सामाजिक नियमों और रूढ़ियों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। प्रेम, स्वतंत्रता, मानवीय संवेदना और आत्म-अनुभव मनुष्य के जीवन को वास्तविक अर्थ प्रदान करते हैं। यह उपन्यास व्यक्ति और समाज के संबंधों, मानवीय भावनाओं तथा जीवन की निरंतर खोज को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करता है।
Submit a Review
0 Review Of Product Srikanth(श्रीकांत)