Author: Rakesh Kumar Mittal
Sresth Prashasan(श्रेष्ठ प्रशासन)
‘श्रेष्ठ प्रशासन’ में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश कुमार मित्तल ने प्रशासन को केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने वाली व्यवस्था न मानकर समाज के विकास और जनकल्याण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। लेखक के अनुसार श्रेष्ठ प्रशासन की शुरुआत श्रेष्ठ और स्वस्थ चिंतन से होती है। जब प्रशासन से जुड़े व्यक्ति सकारात्मक, व्यापक, विकासशील और समाजहितकारी दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो उसका प्रभाव पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और समाज पर दिखाई देता है।
पुस्तक में प्रशासनिक कार्यों में सत्यनिष्ठा को विशेष महत्व दिया गया है। सत्यनिष्ठा का अर्थ केवल भ्रष्टाचार से दूर रहना नहीं, बल्कि ईमानदारी, साहस, कर्तव्यनिष्ठा, जिम्मेदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुणों का समन्वय है। एक श्रेष्ठ प्रशासक को कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्षता और नैतिकता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। प्रशासन में कार्यरत व्यक्ति का आचरण ही जनता के विश्वास को मजबूत करता है।
लेखक का दृष्टिकोण है कि प्रशासन में सुधार केवल व्यवस्था या कानून बदलने से नहीं, बल्कि उसमें कार्य करने वाले लोगों की सोच और कार्यशैली में परिवर्तन से संभव है। यदि अधिकारी समस्याओं के लिए केवल दूसरों को दोष देने के बजाय स्वयं अपनी जिम्मेदारी को समझें और समाधान खोजने का प्रयास करें, तो प्रशासन अधिक प्रभावी बन सकता है। सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन, संवेदनशीलता और सेवा-भाव प्रशासनिक उत्कृष्टता के महत्वपूर्ण आधार हैं।
‘श्रेष्ठ प्रशासन’ का मूल संदेश है कि अच्छा प्रशासन वही है जो जनता की आवश्यकताओं को समझे, निष्पक्ष निर्णय ले, ईमानदारी से कार्य करे और विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करे। प्रशासनिक अधिकारी का वास्तविक मूल्य उसके पद में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, निर्णयों, कर्तव्यनिष्ठा और समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव में है। इस प्रकार पुस्तक प्रशासन को मानवीय मूल्यों, स्वस्थ चिंतन और जनसेवा से जोड़ते हुए बेहतर शासन व्यवस्था की दिशा दिखाती है।
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ISBN : 9789380089461
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Publication: Divyansh Publicaions
Description:
‘श्रेष्ठ प्रशासन’ में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश कुमार मित्तल ने प्रशासन को केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने वाली व्यवस्था न मानकर समाज के विकास और जनकल्याण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। लेखक के अनुसार श्रेष्ठ प्रशासन की शुरुआत श्रेष्ठ और स्वस्थ चिंतन से होती है। जब प्रशासन से जुड़े व्यक्ति सकारात्मक, व्यापक, विकासशील और समाजहितकारी दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो उसका प्रभाव पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और समाज पर दिखाई देता है।
पुस्तक में प्रशासनिक कार्यों में सत्यनिष्ठा को विशेष महत्व दिया गया है। सत्यनिष्ठा का अर्थ केवल भ्रष्टाचार से दूर रहना नहीं, बल्कि ईमानदारी, साहस, कर्तव्यनिष्ठा, जिम्मेदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुणों का समन्वय है। एक श्रेष्ठ प्रशासक को कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्षता और नैतिकता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। प्रशासन में कार्यरत व्यक्ति का आचरण ही जनता के विश्वास को मजबूत करता है।
लेखक का दृष्टिकोण है कि प्रशासन में सुधार केवल व्यवस्था या कानून बदलने से नहीं, बल्कि उसमें कार्य करने वाले लोगों की सोच और कार्यशैली में परिवर्तन से संभव है। यदि अधिकारी समस्याओं के लिए केवल दूसरों को दोष देने के बजाय स्वयं अपनी जिम्मेदारी को समझें और समाधान खोजने का प्रयास करें, तो प्रशासन अधिक प्रभावी बन सकता है। सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन, संवेदनशीलता और सेवा-भाव प्रशासनिक उत्कृष्टता के महत्वपूर्ण आधार हैं।
‘श्रेष्ठ प्रशासन’ का मूल संदेश है कि अच्छा प्रशासन वही है जो जनता की आवश्यकताओं को समझे, निष्पक्ष निर्णय ले, ईमानदारी से कार्य करे और विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करे। प्रशासनिक अधिकारी का वास्तविक मूल्य उसके पद में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, निर्णयों, कर्तव्यनिष्ठा और समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव में है। इस प्रकार पुस्तक प्रशासन को मानवीय मूल्यों, स्वस्थ चिंतन और जनसेवा से जोड़ते हुए बेहतर शासन व्यवस्था की दिशा दिखाती है।
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