Author: Rahul Sankrityayan
Soodkhor Ki Maut(सूदखोर की मौत)
"सूदखोर की मौत" Rahul Sankrityayan की एक महत्वपूर्ण सामाजिक कृति है। यह मूलतः मध्य एशियाई समाज की पृष्ठभूमि पर आधारित कथा है, जिसमें एक निर्दयी सूदखोर के जीवन के माध्यम से शोषण, लालच और अन्याय के दुष्परिणामों को उजागर किया गया है। यह पुस्तक 1952 में प्रकाशित हुई थी।
कहानी का मुख्य पात्र कारी इस्मत नामक एक धनी सूदखोर है, जो लोगों की मजबूरी का लाभ उठाकर ऊँचे ब्याज पर धन उधार देता है। वह गरीबों, व्यापारियों और कर्ज़दारों का आर्थिक शोषण करता है तथा धन-संपत्ति इकट्ठा करने को ही जीवन का उद्देश्य मानता है। उसके कठोर और स्वार्थपूर्ण व्यवहार के कारण समाज में उसके प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भय और घृणा का भाव उत्पन्न होता है। अंततः उसका लालच और अमानवीय जीवन ही उसके पतन का कारण बनता है और उसका दुखद अंत हो जाता है।
राहुल सांकृत्यायन ने इस कृति के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि सूदखोरी, शोषण और लालच पर आधारित जीवन कभी स्थायी सुख नहीं दे सकता। धन से अधिक महत्वपूर्ण मानवता, न्याय और करुणा हैं। जो व्यक्ति दूसरों की विवशता का लाभ उठाता है, उसका अंत अंततः दुखद ही होता है।
"सूदखोर की मौत" का मुख्य संदेश यह है कि ईमानदारी, परिश्रम और मानवीय संवेदनाएँ ही समाज को न्यायपूर्ण बनाती हैं, जबकि लालच और शोषण अंततः विनाश का कारण बनते हैं। यह कृति सामाजिक चेतना, आर्थिक न्याय और नैतिक मूल्यों का प्रभावशाली संदेश देती है।
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ISBN : 978-93-7670-557-3
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Publication: Kitabking
Description:
"सूदखोर की मौत" Rahul Sankrityayan की एक महत्वपूर्ण सामाजिक कृति है। यह मूलतः मध्य एशियाई समाज की पृष्ठभूमि पर आधारित कथा है, जिसमें एक निर्दयी सूदखोर के जीवन के माध्यम से शोषण, लालच और अन्याय के दुष्परिणामों को उजागर किया गया है। यह पुस्तक 1952 में प्रकाशित हुई थी।
कहानी का मुख्य पात्र कारी इस्मत नामक एक धनी सूदखोर है, जो लोगों की मजबूरी का लाभ उठाकर ऊँचे ब्याज पर धन उधार देता है। वह गरीबों, व्यापारियों और कर्ज़दारों का आर्थिक शोषण करता है तथा धन-संपत्ति इकट्ठा करने को ही जीवन का उद्देश्य मानता है। उसके कठोर और स्वार्थपूर्ण व्यवहार के कारण समाज में उसके प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भय और घृणा का भाव उत्पन्न होता है। अंततः उसका लालच और अमानवीय जीवन ही उसके पतन का कारण बनता है और उसका दुखद अंत हो जाता है।
राहुल सांकृत्यायन ने इस कृति के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि सूदखोरी, शोषण और लालच पर आधारित जीवन कभी स्थायी सुख नहीं दे सकता। धन से अधिक महत्वपूर्ण मानवता, न्याय और करुणा हैं। जो व्यक्ति दूसरों की विवशता का लाभ उठाता है, उसका अंत अंततः दुखद ही होता है।
"सूदखोर की मौत" का मुख्य संदेश यह है कि ईमानदारी, परिश्रम और मानवीय संवेदनाएँ ही समाज को न्यायपूर्ण बनाती हैं, जबकि लालच और शोषण अंततः विनाश का कारण बनते हैं। यह कृति सामाजिक चेतना, आर्थिक न्याय और नैतिक मूल्यों का प्रभावशाली संदेश देती है।
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