Rajni(रजनी)

रजनी बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का एक प्रसिद्ध सामाजिक-दार्शनिक उपन्यास है। इस उपन्यास में प्रेम, त्याग, सेवा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। बंकिमचंद्र ने समाज की रूढ़ियों, मानवीय संबंधों और आदर्श जीवन-मूल्यों को सरल एवं प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है।

उपन्यास की नायिका रजनी जन्म से दृष्टिहीन (अंधी) है, किंतु उसका चरित्र अत्यंत पवित्र, विनम्र, धैर्यवान और करुणामयी है। वह अपनी शारीरिक कमी को कभी दुर्बलता नहीं बनने देती। रजनी अपने मधुर व्यवहार, त्याग, सेवा-भाव और उच्च नैतिक आदर्शों के कारण सभी का सम्मान प्राप्त करती है। कथा में प्रेम, पारिवारिक संबंध, संपत्ति-विवाद और सामाजिक परिस्थितियों के बीच अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं, परंतु रजनी अपने धैर्य और सद्गुणों से हर कठिनाई का सामना करती है। अंततः सत्य, प्रेम और सदाचार की विजय होती है तथा अनेक गलतफहमियाँ दूर हो जाती हैं।

यह उपन्यास बताता है कि मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके रूप में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, आचरण और मानवीय गुणों में निहित होता है।

संदेश: रजनी का मूल संदेश है कि प्रेम, त्याग, सेवा, धैर्य और नैतिकता जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं। बाहरी रूप या शारीरिक सीमाएँ व्यक्ति की महानता का मापदंड नहीं होतीं; सच्चा सम्मान उसके सद्गुणों, मानवता और अच्छे चरित्र से प्राप्त होता है।

 
 

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ISBN : 978-93-7670-331-9

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Publication: Kitabkng
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रजनी बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का एक प्रसिद्ध सामाजिक-दार्शनिक उपन्यास है। इस उपन्यास में प्रेम, त्याग, सेवा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। बंकिमचंद्र ने समाज की रूढ़ियों, मानवीय संबंधों और आदर्श जीवन-मूल्यों को सरल एवं प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है।

उपन्यास की नायिका रजनी जन्म से दृष्टिहीन (अंधी) है, किंतु उसका चरित्र अत्यंत पवित्र, विनम्र, धैर्यवान और करुणामयी है। वह अपनी शारीरिक कमी को कभी दुर्बलता नहीं बनने देती। रजनी अपने मधुर व्यवहार, त्याग, सेवा-भाव और उच्च नैतिक आदर्शों के कारण सभी का सम्मान प्राप्त करती है। कथा में प्रेम, पारिवारिक संबंध, संपत्ति-विवाद और सामाजिक परिस्थितियों के बीच अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं, परंतु रजनी अपने धैर्य और सद्गुणों से हर कठिनाई का सामना करती है। अंततः सत्य, प्रेम और सदाचार की विजय होती है तथा अनेक गलतफहमियाँ दूर हो जाती हैं।

यह उपन्यास बताता है कि मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके रूप में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, आचरण और मानवीय गुणों में निहित होता है।

संदेश: रजनी का मूल संदेश है कि प्रेम, त्याग, सेवा, धैर्य और नैतिकता जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं। बाहरी रूप या शारीरिक सीमाएँ व्यक्ति की महानता का मापदंड नहीं होतीं; सच्चा सम्मान उसके सद्गुणों, मानवता और अच्छे चरित्र से प्राप्त होता है।

 
 

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Bankimchandra chattopadhyay

Bankim Chandra Chattopadhyay CIE (anglicised as Bankim Chandra Chatterjee; 26 June 1838[4] – 8 April 1894[5]) was a Bengali novelist, poet, essayist[6] and journalist.[7] He was the author of the 1882 Bengali language novel Anandamath, which is one of the landmarks of modern Bengali and Indian literature. He was the composer of Vande Mataram, written in highly Sanskritised Bengali, personifying India as a mother goddess.
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