Prema(प्रेमा) PB

प्रेमा मुंशी प्रेमचंद का प्रारंभिक सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में समाज में प्रचलित कुरीतियों, विशेषकर बाल-विवाह, विधवा-विवाह और स्त्री-शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाया गया है। प्रेमचंद ने सामाजिक सुधार की भावना को कथा के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

उपन्यास की नायिका प्रेमा एक शिक्षित, संवेदनशील और आदर्शवादी युवती है। वह समाज में व्याप्त रूढ़ियों और अन्याय का विरोध करती है तथा मानवता, समानता और नैतिक मूल्यों का समर्थन करती है। कथा में प्रेम, कर्तव्य और सामाजिक दायित्व के बीच उत्पन्न संघर्ष का मार्मिक चित्रण किया गया है। विभिन्न पात्रों के माध्यम से लेखक यह दिखाते हैं कि संकीर्ण सामाजिक परंपराएँ व्यक्ति और समाज दोनों के विकास में बाधा बनती हैं।

कहानी आगे बढ़ते हुए इस विचार को स्थापित करती है कि शिक्षा, विवेक और सामाजिक जागरूकता से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। अंततः उपन्यास सामाजिक सुधार, त्याग और आदर्श जीवन-मूल्यों की विजय का संदेश देता है।

संदेश: प्रेमा का मूल संदेश है कि समाज की प्रगति के लिए स्त्री-शिक्षा, सामाजिक समानता और कुरीतियों का उन्मूलन आवश्यक है। मनुष्य को रूढ़ियों के बजाय सत्य, न्याय, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए।

₹ 160.00 ₹199

Inclusive of all taxes

ISBN : 978-93-7670-994-6

  • 1

    Warranty

  • 1 Guarantee

  • COD Avilable

  • Returnable

  • cancelable

SKU: KK-PRM
Publication: Kitabking
Description:

प्रेमा मुंशी प्रेमचंद का प्रारंभिक सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में समाज में प्रचलित कुरीतियों, विशेषकर बाल-विवाह, विधवा-विवाह और स्त्री-शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाया गया है। प्रेमचंद ने सामाजिक सुधार की भावना को कथा के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

उपन्यास की नायिका प्रेमा एक शिक्षित, संवेदनशील और आदर्शवादी युवती है। वह समाज में व्याप्त रूढ़ियों और अन्याय का विरोध करती है तथा मानवता, समानता और नैतिक मूल्यों का समर्थन करती है। कथा में प्रेम, कर्तव्य और सामाजिक दायित्व के बीच उत्पन्न संघर्ष का मार्मिक चित्रण किया गया है। विभिन्न पात्रों के माध्यम से लेखक यह दिखाते हैं कि संकीर्ण सामाजिक परंपराएँ व्यक्ति और समाज दोनों के विकास में बाधा बनती हैं।

कहानी आगे बढ़ते हुए इस विचार को स्थापित करती है कि शिक्षा, विवेक और सामाजिक जागरूकता से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। अंततः उपन्यास सामाजिक सुधार, त्याग और आदर्श जीवन-मूल्यों की विजय का संदेश देता है।

संदेश: प्रेमा का मूल संदेश है कि समाज की प्रगति के लिए स्त्री-शिक्षा, सामाजिक समानता और कुरीतियों का उन्मूलन आवश्यक है। मनुष्य को रूढ़ियों के बजाय सत्य, न्याय, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए।

Submit a Review

Write Your Review

0 Review Of Product Prema(प्रेमा) PB

Premchand

Munshi Premchand (1880–1936) was one of the greatest writers in Hindi and Urdu literature. Munshi Premchand is often called the \"Upanyas Samrat\" (Emperor of Novels) for his outstanding contribution to Indian literature. His real name was Dhanpat Rai Srivastava, and he initially wrote under the pen name \"Nawab Rai.\"\r\n\r\nPremchand\'s works focused on social issues such as poverty, caste discrimination, exploitation of peasants, women\'s rights, and moral values. His writing was known for its realism and deep understanding of rural Indian life.
Forgot Password?
OR

No account Yet?