Prabhavati(प्रभावती) PB

प्रभावती सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक-सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में प्रेम, कर्तव्य, साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है। निराला ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के माध्यम से मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति का प्रभावशाली चित्रण किया है।

उपन्यास की नायिका प्रभावती एक बुद्धिमती, साहसी और स्वाभिमानी युवती है। वह केवल सौंदर्य की प्रतीक नहीं, बल्कि आदर्श नारी के रूप में चित्रित की गई है। परिस्थितियाँ उसके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ और संघर्ष लेकर आती हैं, परंतु वह धैर्य, विवेक और आत्मबल से उनका सामना करती है। प्रेम और कर्तव्य के बीच उत्पन्न द्वंद्व के बावजूद वह सदैव सत्य, नैतिकता और समाजहित को प्राथमिकता देती है।

कथा में राजनीतिक षड्यंत्र, पारिवारिक संबंध, सामाजिक मर्यादाएँ तथा देशहित की भावना का भी प्रभावशाली चित्रण मिलता है। अंततः सत्य, न्याय और सदाचार की विजय होती है तथा प्रभावती का चरित्र त्याग, निष्ठा और आदर्श जीवन का प्रतीक बनकर उभरता है।

संदेश: यह उपन्यास बताता है कि जीवन में सच्ची सफलता केवल प्रेम या वैभव से नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य, आत्मसम्मान और त्याग से प्राप्त होती है। कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला व्यक्ति अंततः सम्मान और सफलता प्राप्त करता है।

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ISBN : 978-93-7670-287-9

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Publication: Kitabking
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प्रभावती सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक-सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में प्रेम, कर्तव्य, साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है। निराला ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के माध्यम से मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति का प्रभावशाली चित्रण किया है।

उपन्यास की नायिका प्रभावती एक बुद्धिमती, साहसी और स्वाभिमानी युवती है। वह केवल सौंदर्य की प्रतीक नहीं, बल्कि आदर्श नारी के रूप में चित्रित की गई है। परिस्थितियाँ उसके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ और संघर्ष लेकर आती हैं, परंतु वह धैर्य, विवेक और आत्मबल से उनका सामना करती है। प्रेम और कर्तव्य के बीच उत्पन्न द्वंद्व के बावजूद वह सदैव सत्य, नैतिकता और समाजहित को प्राथमिकता देती है।

कथा में राजनीतिक षड्यंत्र, पारिवारिक संबंध, सामाजिक मर्यादाएँ तथा देशहित की भावना का भी प्रभावशाली चित्रण मिलता है। अंततः सत्य, न्याय और सदाचार की विजय होती है तथा प्रभावती का चरित्र त्याग, निष्ठा और आदर्श जीवन का प्रतीक बनकर उभरता है।

संदेश: यह उपन्यास बताता है कि जीवन में सच्ची सफलता केवल प्रेम या वैभव से नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य, आत्मसम्मान और त्याग से प्राप्त होती है। कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला व्यक्ति अंततः सम्मान और सफलता प्राप्त करता है।

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Suryakant Tripathi Nirala

Suryakant Tripathi \'Nirala\' हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे महान कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता, करुणा और विद्रोह की भावना का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने हिन्दी कविता को नई भाषा, नवीन शिल्प और स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी प्रमुख कृतियों में परिमल, अनामिका, सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सरल, संवेदनशील और ओजस्वी लेखन के कारण निराला हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रभावशाली रचनाकारों में गिने जाते हैं और आज भी उनकी रचनाएँ पाठकों को प्रेरित करती हैं।
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