Nirupama(निरुपमा)

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'निरूपमा' एक सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज की रूढ़ियों, जाति-भेद, दहेज-प्रथा, स्त्री-असमानता तथा सामाजिक अन्याय का यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास की नायिका निरूपमा एक शिक्षित, संवेदनशील, स्वाभिमानी और आदर्शवादी युवती है। वह समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध करती है और अपने जीवन में स्वतंत्र विचारों को अपनाने का साहस दिखाती है।

कहानी में निरूपमा के जीवन के माध्यम से यह दिखाया गया है कि किस प्रकार समाज की संकीर्ण परंपराएँ और रूढ़िवादी सोच एक स्त्री के जीवन को प्रभावित करती हैं। विवाह, दहेज, जातिगत भेदभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय कथा के प्रमुख आधार हैं। निरूपमा अपने आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करती तथा कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का साथ देती है।

उपन्यास में निराला ने नारी-शिक्षा, स्त्री-स्वतंत्रता, समानता और मानवीय मूल्यों का प्रभावशाली समर्थन किया है। सरल भाषा, सशक्त चरित्र-चित्रण और यथार्थवादी शैली इस कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। 'निरूपमा' केवल एक स्त्री के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उस समय के समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करने वाला उपन्यास है, जो आज भी समानता, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन का प्रेरक संदेश देता है।

 
 

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ISBN : 978-93-7670-481-1

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Publication: Kitabking
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'निरूपमा' एक सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज की रूढ़ियों, जाति-भेद, दहेज-प्रथा, स्त्री-असमानता तथा सामाजिक अन्याय का यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास की नायिका निरूपमा एक शिक्षित, संवेदनशील, स्वाभिमानी और आदर्शवादी युवती है। वह समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध करती है और अपने जीवन में स्वतंत्र विचारों को अपनाने का साहस दिखाती है।

कहानी में निरूपमा के जीवन के माध्यम से यह दिखाया गया है कि किस प्रकार समाज की संकीर्ण परंपराएँ और रूढ़िवादी सोच एक स्त्री के जीवन को प्रभावित करती हैं। विवाह, दहेज, जातिगत भेदभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय कथा के प्रमुख आधार हैं। निरूपमा अपने आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करती तथा कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का साथ देती है।

उपन्यास में निराला ने नारी-शिक्षा, स्त्री-स्वतंत्रता, समानता और मानवीय मूल्यों का प्रभावशाली समर्थन किया है। सरल भाषा, सशक्त चरित्र-चित्रण और यथार्थवादी शैली इस कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। 'निरूपमा' केवल एक स्त्री के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उस समय के समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करने वाला उपन्यास है, जो आज भी समानता, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन का प्रेरक संदेश देता है।

 
 

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Suryakant Tripathi Nirala

Suryakant Tripathi \'Nirala\' हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे महान कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता, करुणा और विद्रोह की भावना का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने हिन्दी कविता को नई भाषा, नवीन शिल्प और स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी प्रमुख कृतियों में परिमल, अनामिका, सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सरल, संवेदनशील और ओजस्वी लेखन के कारण निराला हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रभावशाली रचनाकारों में गिने जाते हैं और आज भी उनकी रचनाएँ पाठकों को प्रेरित करती हैं।
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