Author: Bankimchandra chattopadhyay
Mrinalini(मृणालिनी)
मृणालिनी' बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1869 में हुआ। इसकी कथा मध्यकालीन भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें प्रेम, देशभक्ति, कर्तव्य, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। लेखक ने व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्रधर्म के बीच उत्पन्न संघर्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
उपन्यास का नायक हेमचंद्र एक वीर, बुद्धिमान और राष्ट्रभक्त युवक है, जो मृणालिनी से प्रेम करता है। किन्तु देश पर आए संकट के समय उसे अपने व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य में से एक का चयन करना पड़ता है। अनेक संघर्षों, षड्यंत्रों और कठिन परिस्थितियों के बीच हेमचंद्र अपने राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानता है। दूसरी ओर, मृणालिनी भी त्याग, धैर्य और निष्ठा का आदर्श प्रस्तुत करती है। अंततः सत्य, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की विजय होती है।
इस उपन्यास के माध्यम से बंकिमचंद्र ने यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत सुख से बढ़कर राष्ट्र और समाज का हित होता है। प्रेम तभी सार्थक है जब उसमें त्याग, निष्ठा और कर्तव्य की भावना हो।
'मृणालिनी' भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा की महत्वपूर्ण कृति है। यह प्रेम, राष्ट्रभक्ति, आदर्श जीवन और नैतिक मूल्यों का प्रेरणादायक चित्र प्रस्तुत करती है तथा पाठकों में देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करती है।
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ISBN : 978-93-7670-971-7
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Publication: Ktabking
Description:
मृणालिनी' बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1869 में हुआ। इसकी कथा मध्यकालीन भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें प्रेम, देशभक्ति, कर्तव्य, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। लेखक ने व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्रधर्म के बीच उत्पन्न संघर्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
उपन्यास का नायक हेमचंद्र एक वीर, बुद्धिमान और राष्ट्रभक्त युवक है, जो मृणालिनी से प्रेम करता है। किन्तु देश पर आए संकट के समय उसे अपने व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य में से एक का चयन करना पड़ता है। अनेक संघर्षों, षड्यंत्रों और कठिन परिस्थितियों के बीच हेमचंद्र अपने राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानता है। दूसरी ओर, मृणालिनी भी त्याग, धैर्य और निष्ठा का आदर्श प्रस्तुत करती है। अंततः सत्य, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की विजय होती है।
इस उपन्यास के माध्यम से बंकिमचंद्र ने यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत सुख से बढ़कर राष्ट्र और समाज का हित होता है। प्रेम तभी सार्थक है जब उसमें त्याग, निष्ठा और कर्तव्य की भावना हो।
'मृणालिनी' भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा की महत्वपूर्ण कृति है। यह प्रेम, राष्ट्रभक्ति, आदर्श जीवन और नैतिक मूल्यों का प्रेरणादायक चित्र प्रस्तुत करती है तथा पाठकों में देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करती है।
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