Author: Mahatma Gandhi
Mere Sapnon Ka Bharat(मेरे सपनों का भारत)
मेरे सपनों का भारत' महात्मा गांधी के विचारों का संकलन है, जिसमें उन्होंने एक आदर्श, आत्मनिर्भर और नैतिक भारत की अपनी कल्पना प्रस्तुत की है। गांधीजी के अनुसार भारत की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, श्रम और सेवा के आदर्शों का पालन करे। वे मानते थे कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और नैतिक भी होनी चाहिए।
इस पुस्तक में गांधीजी ने ग्राम स्वराज, स्वदेशी, कुटीर उद्योग, सामाजिक समानता, धार्मिक सद्भाव और शिक्षा को राष्ट्र-निर्माण के प्रमुख आधार बताया है। उनका विश्वास था कि भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, इसलिए ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने जाति-पाँति, छुआछूत, गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक भेदभाव को राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाएँ माना तथा इनके उन्मूलन का आह्वान किया।
गांधीजी का सपना था कि भारत ऐसा राष्ट्र बने जहाँ सभी नागरिक समान अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें, सभी धर्मों का आदर हो और शासन जनता के कल्याण के लिए कार्य करे। उनका आदर्श भारत प्रेम, शांति, सहयोग और नैतिक मूल्यों पर आधारित है।
'मेरे सपनों का भारत' राष्ट्र निर्माण, मानवता और आदर्श समाज की प्रेरणा देने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है, जो आज भी आत्मनिर्भर, समरस और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शक मानी जाती है।
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ISBN : 978-93-7670-459-0
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Publication: Kitabking
Description:
मेरे सपनों का भारत' महात्मा गांधी के विचारों का संकलन है, जिसमें उन्होंने एक आदर्श, आत्मनिर्भर और नैतिक भारत की अपनी कल्पना प्रस्तुत की है। गांधीजी के अनुसार भारत की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, श्रम और सेवा के आदर्शों का पालन करे। वे मानते थे कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और नैतिक भी होनी चाहिए।
इस पुस्तक में गांधीजी ने ग्राम स्वराज, स्वदेशी, कुटीर उद्योग, सामाजिक समानता, धार्मिक सद्भाव और शिक्षा को राष्ट्र-निर्माण के प्रमुख आधार बताया है। उनका विश्वास था कि भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, इसलिए ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने जाति-पाँति, छुआछूत, गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक भेदभाव को राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाएँ माना तथा इनके उन्मूलन का आह्वान किया।
गांधीजी का सपना था कि भारत ऐसा राष्ट्र बने जहाँ सभी नागरिक समान अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें, सभी धर्मों का आदर हो और शासन जनता के कल्याण के लिए कार्य करे। उनका आदर्श भारत प्रेम, शांति, सहयोग और नैतिक मूल्यों पर आधारित है।
'मेरे सपनों का भारत' राष्ट्र निर्माण, मानवता और आदर्श समाज की प्रेरणा देने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है, जो आज भी आत्मनिर्भर, समरस और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शक मानी जाती है।
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