Author: Suryakant Tripathi Nirala
Kulli Bhat(कुल्ली भाट)
'कुल्ली भाट' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर समाज, जाति-व्यवस्था, मानवता और सामाजिक विषमताओं का सजीव चित्रण किया है। इस कृति का केंद्रीय पात्र कुल्ली है, जो निम्न सामाजिक वर्ग से होने के बावजूद उदार, संवेदनशील, कर्मठ और आत्मसम्मानी व्यक्ति है।
उपन्यास में निराला और कुल्ली के बीच विकसित आत्मीय संबंधों के माध्यम से लेखक ने यह सिद्ध किया है कि मनुष्य की महानता उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और मानवीय गुणों से निर्धारित होती है। कुल्ली समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और रूढ़ियों का सामना करता है, फिर भी वह मानवता, प्रेम और सेवा की भावना को नहीं छोड़ता।
निराला ने इस रचना में सामाजिक पाखंड, ऊँच-नीच और रूढ़िवादिता की तीखी आलोचना की है। उनकी भाषा सरल, आत्मीय और यथार्थवादी है, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। यह कृति सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और उदार दृष्टिकोण का सशक्त संदेश देती है।
'कुल्ली भाट' हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो सामाजिक चेतना, मानवता और समानता के आदर्शों को स्थापित करती है। यह उपन्यास पाठकों को जाति और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक मनुष्य का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
'कुल्ली भाट' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर समाज, जाति-व्यवस्था, मानवता और सामाजिक विषमताओं का सजीव चित्रण किया है। इस कृति का केंद्रीय पात्र कुल्ली है, जो निम्न सामाजिक वर्ग से होने के बावजूद उदार, संवेदनशील, कर्मठ और आत्मसम्मानी व्यक्ति है।
उपन्यास में निराला और कुल्ली के बीच विकसित आत्मीय संबंधों के माध्यम से लेखक ने यह सिद्ध किया है कि मनुष्य की महानता उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और मानवीय गुणों से निर्धारित होती है। कुल्ली समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और रूढ़ियों का सामना करता है, फिर भी वह मानवता, प्रेम और सेवा की भावना को नहीं छोड़ता।
निराला ने इस रचना में सामाजिक पाखंड, ऊँच-नीच और रूढ़िवादिता की तीखी आलोचना की है। उनकी भाषा सरल, आत्मीय और यथार्थवादी है, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। यह कृति सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और उदार दृष्टिकोण का सशक्त संदेश देती है।
'कुल्ली भाट' हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो सामाजिक चेतना, मानवता और समानता के आदर्शों को स्थापित करती है। यह उपन्यास पाठकों को जाति और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक मनुष्य का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
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ISBN : 978-93-7670-756-0
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'कुल्ली भाट' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर समाज, जाति-व्यवस्था, मानवता और सामाजिक विषमताओं का सजीव चित्रण किया है। इस कृति का केंद्रीय पात्र कुल्ली है, जो निम्न सामाजिक वर्ग से होने के बावजूद उदार, संवेदनशील, कर्मठ और आत्मसम्मानी व्यक्ति है।
उपन्यास में निराला और कुल्ली के बीच विकसित आत्मीय संबंधों के माध्यम से लेखक ने यह सिद्ध किया है कि मनुष्य की महानता उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और मानवीय गुणों से निर्धारित होती है। कुल्ली समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और रूढ़ियों का सामना करता है, फिर भी वह मानवता, प्रेम और सेवा की भावना को नहीं छोड़ता।
निराला ने इस रचना में सामाजिक पाखंड, ऊँच-नीच और रूढ़िवादिता की तीखी आलोचना की है। उनकी भाषा सरल, आत्मीय और यथार्थवादी है, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। यह कृति सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और उदार दृष्टिकोण का सशक्त संदेश देती है।
'कुल्ली भाट' हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो सामाजिक चेतना, मानवता और समानता के आदर्शों को स्थापित करती है। यह उपन्यास पाठकों को जाति और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक मनुष्य का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
'कुल्ली भाट' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास है, जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर समाज, जाति-व्यवस्था, मानवता और सामाजिक विषमताओं का सजीव चित्रण किया है। इस कृति का केंद्रीय पात्र कुल्ली है, जो निम्न सामाजिक वर्ग से होने के बावजूद उदार, संवेदनशील, कर्मठ और आत्मसम्मानी व्यक्ति है।
उपन्यास में निराला और कुल्ली के बीच विकसित आत्मीय संबंधों के माध्यम से लेखक ने यह सिद्ध किया है कि मनुष्य की महानता उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और मानवीय गुणों से निर्धारित होती है। कुल्ली समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और रूढ़ियों का सामना करता है, फिर भी वह मानवता, प्रेम और सेवा की भावना को नहीं छोड़ता।
निराला ने इस रचना में सामाजिक पाखंड, ऊँच-नीच और रूढ़िवादिता की तीखी आलोचना की है। उनकी भाषा सरल, आत्मीय और यथार्थवादी है, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है। यह कृति सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और उदार दृष्टिकोण का सशक्त संदेश देती है।
'कुल्ली भाट' हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो सामाजिक चेतना, मानवता और समानता के आदर्शों को स्थापित करती है। यह उपन्यास पाठकों को जाति और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक मनुष्य का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
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