Author: Premchand
Karbala(कर्बला)
"कर्बला" Premchand द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक है। इसका आधार कर्बला की ऐतिहासिक घटना है, जिसमें Imam Husayn ibn Ali ने सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। प्रेमचंद ने इस घटना को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, साहस और नैतिक आदर्शों के रूप में प्रस्तुत किया है।
नाटक में दिखाया गया है कि यज़ीद की अन्यायपूर्ण सत्ता के सामने इमाम हुसैन ने झुकने से इनकार कर दिया। वे अपने परिवार और साथियों के साथ कर्बला पहुँचे, जहाँ उन्हें पानी तक से वंचित कर दिया गया। अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अन्याय के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया। अंततः इमाम हुसैन और उनके अधिकांश साथी वीरगति को प्राप्त हुए, किंतु उन्होंने सत्य और धर्म के मार्ग का परित्याग नहीं किया।
प्रेमचंद ने इस कृति के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। व्यक्ति को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़ा होना चाहिए, चाहे उसके लिए कितना भी बड़ा बलिदान क्यों न देना पड़े। "कर्बला" त्याग, साहस, नैतिकता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रेरणादायक नाटक है, जो आज भी मानवता और न्याय की रक्षा का संदेश देता है।
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ISBN : 978-93-7670-741-6
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Publication: Kitabking
Description:
"कर्बला" Premchand द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक है। इसका आधार कर्बला की ऐतिहासिक घटना है, जिसमें Imam Husayn ibn Ali ने सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। प्रेमचंद ने इस घटना को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, साहस और नैतिक आदर्शों के रूप में प्रस्तुत किया है।
नाटक में दिखाया गया है कि यज़ीद की अन्यायपूर्ण सत्ता के सामने इमाम हुसैन ने झुकने से इनकार कर दिया। वे अपने परिवार और साथियों के साथ कर्बला पहुँचे, जहाँ उन्हें पानी तक से वंचित कर दिया गया। अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अन्याय के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया। अंततः इमाम हुसैन और उनके अधिकांश साथी वीरगति को प्राप्त हुए, किंतु उन्होंने सत्य और धर्म के मार्ग का परित्याग नहीं किया।
प्रेमचंद ने इस कृति के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। व्यक्ति को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़ा होना चाहिए, चाहे उसके लिए कितना भी बड़ा बलिदान क्यों न देना पड़े। "कर्बला" त्याग, साहस, नैतिकता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रेरणादायक नाटक है, जो आज भी मानवता और न्याय की रक्षा का संदेश देता है।
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