Kankal(कंकाल)

कंकाल' जयशंकर प्रसाद का प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज की रूढ़ियों, धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और नैतिक पतन का यथार्थ चित्रण किया गया है। इस उपन्यास के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त खोखले आदर्शों और मानवीय संबंधों की विडंबनाओं को उजागर किया है।

उपन्यास की कथा अनेक पात्रों के जीवन, उनके पारिवारिक संबंधों, प्रेम, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों के इर्द-गिर्द विकसित होती है। प्रसाद ने दिखाया है कि जब मनुष्य बाहरी दिखावे, स्वार्थ और सामाजिक प्रतिष्ठा को अधिक महत्व देता है, तब उसके जीवन से प्रेम, विश्वास और नैतिकता समाप्त होने लगती है। परिणामस्वरूप समाज का वास्तविक स्वरूप केवल एक 'कंकाल' की भाँति खोखला रह जाता है।

लेखक ने सरल किंतु प्रभावशाली शैली में यह स्पष्ट किया है कि मानव जीवन का वास्तविक आधार सत्य, करुणा, समानता और नैतिकता है। उन्होंने स्त्री की स्थिति, सामाजिक अन्याय तथा धार्मिक पाखंड पर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं और समाज में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है।

'कंकाल' केवल एक सामाजिक उपन्यास नहीं, बल्कि तत्कालीन समाज का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण कृति है। यह उपन्यास पाठकों को सामाजिक कुरीतियों से ऊपर उठकर मानवता, नैतिक मूल्यों और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

₹ 320.00 ₹399

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ISBN : 978-81-996879-0-5

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Publication: Kitabking
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कंकाल' जयशंकर प्रसाद का प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज की रूढ़ियों, धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और नैतिक पतन का यथार्थ चित्रण किया गया है। इस उपन्यास के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त खोखले आदर्शों और मानवीय संबंधों की विडंबनाओं को उजागर किया है।

उपन्यास की कथा अनेक पात्रों के जीवन, उनके पारिवारिक संबंधों, प्रेम, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों के इर्द-गिर्द विकसित होती है। प्रसाद ने दिखाया है कि जब मनुष्य बाहरी दिखावे, स्वार्थ और सामाजिक प्रतिष्ठा को अधिक महत्व देता है, तब उसके जीवन से प्रेम, विश्वास और नैतिकता समाप्त होने लगती है। परिणामस्वरूप समाज का वास्तविक स्वरूप केवल एक 'कंकाल' की भाँति खोखला रह जाता है।

लेखक ने सरल किंतु प्रभावशाली शैली में यह स्पष्ट किया है कि मानव जीवन का वास्तविक आधार सत्य, करुणा, समानता और नैतिकता है। उन्होंने स्त्री की स्थिति, सामाजिक अन्याय तथा धार्मिक पाखंड पर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं और समाज में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है।

'कंकाल' केवल एक सामाजिक उपन्यास नहीं, बल्कि तत्कालीन समाज का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण कृति है। यह उपन्यास पाठकों को सामाजिक कुरीतियों से ऊपर उठकर मानवता, नैतिक मूल्यों और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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Jaishankar Prasad

Jaishankar Prasad was one of the most prominent figures of modern Hindi literature and a leading poet of the Chhayavad era. Born in 1889 in Varanasi, he made significant contributions as a poet, dramatist, novelist, and short-story writer. His literary works are known for their philosophical depth, nationalism, humanism, and rich poetic language. His epic poem *Kamayani* is considered one of the greatest masterpieces of Hindi literature. Through works such as *Skandagupta*, *Chandragupta*, and *Dhruvswamini*, he enriched Hindi drama and revived interest in India\'s cultural heritage. Jaishankar Prasad\'s writings continue to inspire readers with their artistic beauty and profound ideas.\r\n
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