Author: Rahul Sankrityayan
Jeene ke liye(जीने के लिए)
"जीने के लिए" Rahul Sankrityayan का एक यथार्थवादी सामाजिक उपन्यास है। यह उनके आरंभिक उपन्यासों में से एक है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज, आर्थिक विषमता, वर्ग-संघर्ष और शोषित वर्ग के जीवन का सजीव चित्रण मिलता है। यह उपन्यास लेखक ने जेल प्रवास के दौरान लिखना प्रारम्भ किया था और इसमें कल्पना की अपेक्षा सामाजिक यथार्थ को अधिक महत्व दिया गया है।
उपन्यास का मूल संदेश यह है कि मनुष्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए जीता है। इसमें ऐसे पात्रों का चित्रण है जो गरीबी, अन्याय, बेरोज़गारी और सामाजिक असमानताओं से संघर्ष करते हुए भी अपने आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों को नहीं छोड़ते। राहुल सांकृत्यायन ने यह दिखाया है कि समाज में व्याप्त शोषण और रूढ़ियों को समाप्त किए बिना वास्तविक सुख और समानता संभव नहीं है।
लेखक श्रम, शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय को बेहतर जीवन का आधार मानते हैं। उपन्यास यह प्रेरणा देता है कि जीवन का उद्देश्य केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि संघर्ष करते हुए स्वयं और समाज को बेहतर बनाना है। "जीने के लिए" मानवता, सामाजिक चेतना, परिश्रम और परिवर्तन की भावना से ओत-प्रोत एक प्रेरणादायक कृति है, जो पाठकों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
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ISBN : 978-93-7670-876-5
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Publication: Kitabking
Description:
"जीने के लिए" Rahul Sankrityayan का एक यथार्थवादी सामाजिक उपन्यास है। यह उनके आरंभिक उपन्यासों में से एक है, जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज, आर्थिक विषमता, वर्ग-संघर्ष और शोषित वर्ग के जीवन का सजीव चित्रण मिलता है। यह उपन्यास लेखक ने जेल प्रवास के दौरान लिखना प्रारम्भ किया था और इसमें कल्पना की अपेक्षा सामाजिक यथार्थ को अधिक महत्व दिया गया है।
उपन्यास का मूल संदेश यह है कि मनुष्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए जीता है। इसमें ऐसे पात्रों का चित्रण है जो गरीबी, अन्याय, बेरोज़गारी और सामाजिक असमानताओं से संघर्ष करते हुए भी अपने आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों को नहीं छोड़ते। राहुल सांकृत्यायन ने यह दिखाया है कि समाज में व्याप्त शोषण और रूढ़ियों को समाप्त किए बिना वास्तविक सुख और समानता संभव नहीं है।
लेखक श्रम, शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय को बेहतर जीवन का आधार मानते हैं। उपन्यास यह प्रेरणा देता है कि जीवन का उद्देश्य केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि संघर्ष करते हुए स्वयं और समाज को बेहतर बनाना है। "जीने के लिए" मानवता, सामाजिक चेतना, परिश्रम और परिवर्तन की भावना से ओत-प्रोत एक प्रेरणादायक कृति है, जो पाठकों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
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