Hindu(हिन्दू)

'हिन्दू' राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की एक महत्वपूर्ण काव्य-कृति है, जिसमें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और मानवता के आदर्शों का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। इस कृति में कवि ने 'हिन्दू' शब्द को केवल एक धर्म का प्रतीक न मानकर भारतीय सभ्यता, उदारता, नैतिकता और सांस्कृतिक गौरव के व्यापक रूप में प्रस्तुत किया है।

कवि भारतीय इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का स्मरण कराते हुए समाज को अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेने का संदेश देते हैं। साथ ही वे जाति-पाँति, छुआछूत, सामाजिक भेदभाव, रूढ़ियों और आपसी वैमनस्य जैसी कुरीतियों की आलोचना करते हैं। गुप्तजी का मत है कि सच्चा धर्म प्रेम, करुणा, सत्य, सेवा और मानव कल्याण में निहित है।

इस काव्य में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और नैतिक जीवन पर विशेष बल दिया गया है। कवि युवाओं को अपने कर्तव्यों का पालन करने, चरित्रवान बनने तथा राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी भाषा सरल, ओजपूर्ण और प्रेरणादायक है, जो पाठकों में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संचार करती है।

'हिन्दू' भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करने वाली एक प्रेरक काव्य-कृति है, जो आज भी सामाजिक जागरूकता और नैतिक जीवन के लिए प्रासंगिक मानी जाती है।

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ISBN : 978-93-7670-080-6

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Publication: Kitabking
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'हिन्दू' राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की एक महत्वपूर्ण काव्य-कृति है, जिसमें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और मानवता के आदर्शों का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। इस कृति में कवि ने 'हिन्दू' शब्द को केवल एक धर्म का प्रतीक न मानकर भारतीय सभ्यता, उदारता, नैतिकता और सांस्कृतिक गौरव के व्यापक रूप में प्रस्तुत किया है।

कवि भारतीय इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का स्मरण कराते हुए समाज को अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेने का संदेश देते हैं। साथ ही वे जाति-पाँति, छुआछूत, सामाजिक भेदभाव, रूढ़ियों और आपसी वैमनस्य जैसी कुरीतियों की आलोचना करते हैं। गुप्तजी का मत है कि सच्चा धर्म प्रेम, करुणा, सत्य, सेवा और मानव कल्याण में निहित है।

इस काव्य में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और नैतिक जीवन पर विशेष बल दिया गया है। कवि युवाओं को अपने कर्तव्यों का पालन करने, चरित्रवान बनने तथा राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी भाषा सरल, ओजपूर्ण और प्रेरणादायक है, जो पाठकों में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संचार करती है।

'हिन्दू' भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करने वाली एक प्रेरक काव्य-कृति है, जो आज भी सामाजिक जागरूकता और नैतिक जीवन के लिए प्रासंगिक मानी जाती है।

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Maithilisharan Gupta

मैथिलीशरण गुप्त (3 अगस्त 1886 – 12 दिसंबर 1964) हिंदी साहित्य के प्रमुख राष्ट्रकवि और खड़ी बोली हिंदी के अग्रणी कवियों में से एक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के चिरगाँव (झाँसी) में हुआ। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में भारत-भारती, साकेत, यशोधरा, जयद्रथ-वध और पंचवटी शामिल हैं। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, इतिहास और मानवीय मूल्यों का सुंदर चित्रण मिलता है। उन्हें हिंदी साहित्य के विकास में उनके अमूल्य योगदान के लिए विशेष सम्मान प्राप्त हुआ।
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