Author: Mahatma Gandhi
Hind Swaraj(हिन्द स्वराज)
'हिन्द स्वराज' महात्मा गांधी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण वैचारिक कृतियों में से एक है। इसका प्रकाशन सन् 1909 में हुआ। यह पुस्तक संवाद शैली में लिखी गई है, जिसमें गांधीजी ने आधुनिक सभ्यता, स्वराज, सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और नैतिक जीवन के अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
पुस्तक में गांधीजी स्पष्ट करते हैं कि स्वराज का अर्थ केवल अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मशासन, आत्मसंयम और नैतिक स्वतंत्रता भी है। उनके अनुसार यदि भारतीय केवल शासकों को बदल दें, लेकिन अपनी सोच, जीवनशैली और चरित्र में परिवर्तन न करें, तो वास्तविक स्वराज की प्राप्ति संभव नहीं होगी। गांधीजी आधुनिक भौतिकवादी सभ्यता की आलोचना करते हुए कहते हैं कि अत्यधिक भोग-विलास, मशीनों पर निर्भरता और अंधाधुंध औद्योगीकरण मानव जीवन को असंतुलित बनाते हैं।
इस कृति में सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, ग्राम-स्वावलंबन और श्रम की प्रतिष्ठा को आदर्श जीवन का आधार बताया गया है। गांधीजी का विश्वास था कि नैतिकता, आत्मबल और जनशक्ति के माध्यम से ही स्थायी स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय प्राप्त किया जा सकता है।
'हिन्द स्वराज' केवल एक राजनीतिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आदर्श समाज की व्यापक व्याख्या है। यह पुस्तक आज भी आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और शांतिपूर्ण परिवर्तन की प्रेरणा देने वाली महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है।
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ISBN : 978-81-996879-9-8
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Publication: Kitabking
Description:
'हिन्द स्वराज' महात्मा गांधी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण वैचारिक कृतियों में से एक है। इसका प्रकाशन सन् 1909 में हुआ। यह पुस्तक संवाद शैली में लिखी गई है, जिसमें गांधीजी ने आधुनिक सभ्यता, स्वराज, सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और नैतिक जीवन के अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
पुस्तक में गांधीजी स्पष्ट करते हैं कि स्वराज का अर्थ केवल अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मशासन, आत्मसंयम और नैतिक स्वतंत्रता भी है। उनके अनुसार यदि भारतीय केवल शासकों को बदल दें, लेकिन अपनी सोच, जीवनशैली और चरित्र में परिवर्तन न करें, तो वास्तविक स्वराज की प्राप्ति संभव नहीं होगी। गांधीजी आधुनिक भौतिकवादी सभ्यता की आलोचना करते हुए कहते हैं कि अत्यधिक भोग-विलास, मशीनों पर निर्भरता और अंधाधुंध औद्योगीकरण मानव जीवन को असंतुलित बनाते हैं।
इस कृति में सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, ग्राम-स्वावलंबन और श्रम की प्रतिष्ठा को आदर्श जीवन का आधार बताया गया है। गांधीजी का विश्वास था कि नैतिकता, आत्मबल और जनशक्ति के माध्यम से ही स्थायी स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय प्राप्त किया जा सकता है।
'हिन्द स्वराज' केवल एक राजनीतिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आदर्श समाज की व्यापक व्याख्या है। यह पुस्तक आज भी आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और शांतिपूर्ण परिवर्तन की प्रेरणा देने वाली महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है।
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