Gautam Buddh Jeevan aur Darshan(गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन)

'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन' में भगवान गौतम बुद्ध के जीवन, उनके आध्यात्मिक विकास तथा उनके दार्शनिक विचारों का सरल एवं प्रेरक वर्णन किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि राजकुमार सिद्धार्थ ने मानव जीवन के दुखों—जन्म, जरा, रोग और मृत्यु—को देखकर सांसारिक सुखों का त्याग किया और सत्य की खोज में निकल पड़े। वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्हें बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे गौतम बुद्ध कहलाए।

पुस्तक में बुद्ध के प्रमुख सिद्धांतों, जैसे चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग, अहिंसा, करुणा, मैत्री और आत्मसंयम का विस्तार से वर्णन किया गया है। बुद्ध ने सिखाया कि मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं निर्माता है तथा तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। उन्होंने जाति-पाँति, अंधविश्वास और कर्मकांड का विरोध करते हुए समानता, नैतिकता और विवेकपूर्ण जीवन पर बल दिया।

यह पुस्तक बताती है कि बुद्ध का दर्शन केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन को शांत, संतुलित और सार्थक बनाने की व्यावहारिक जीवन-पद्धति है। 'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन' पाठकों को सत्य, करुणा, सहिष्णुता, आत्मानुशासन और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है तथा आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है।

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ISBN : 978-93-7670-646-4

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Publication: Kitabking
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'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन' में भगवान गौतम बुद्ध के जीवन, उनके आध्यात्मिक विकास तथा उनके दार्शनिक विचारों का सरल एवं प्रेरक वर्णन किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि राजकुमार सिद्धार्थ ने मानव जीवन के दुखों—जन्म, जरा, रोग और मृत्यु—को देखकर सांसारिक सुखों का त्याग किया और सत्य की खोज में निकल पड़े। वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्हें बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे गौतम बुद्ध कहलाए।

पुस्तक में बुद्ध के प्रमुख सिद्धांतों, जैसे चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग, अहिंसा, करुणा, मैत्री और आत्मसंयम का विस्तार से वर्णन किया गया है। बुद्ध ने सिखाया कि मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं निर्माता है तथा तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। उन्होंने जाति-पाँति, अंधविश्वास और कर्मकांड का विरोध करते हुए समानता, नैतिकता और विवेकपूर्ण जीवन पर बल दिया।

यह पुस्तक बताती है कि बुद्ध का दर्शन केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन को शांत, संतुलित और सार्थक बनाने की व्यावहारिक जीवन-पद्धति है। 'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन' पाठकों को सत्य, करुणा, सहिष्णुता, आत्मानुशासन और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है तथा आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है।

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Gautam Buddha

गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी में शाक्य कुल के राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ। उनके पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम महारानी महामाया था। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर सत्य की खोज आरंभ की। कठोर तपस्या के पश्चात महाबोधि मंदिर में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे गौतम बुद्ध कहलाए। उन्होंने अहिंसा, करुणा, मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग का उपदेश दिया। लगभग 80 वर्ष की आयु में महापरिनिर्वाण मंदिर के निकट कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। उनके विचार आज भी विश्वभर में शांति, मानवता और नैतिक जीवन के प्रेरणास्रोत हैं।
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