Author: Bankimchand
Durgeshnandini(दुर्गेशनंदिनी)
दुर्गेशनंदिनी' बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रथम एवं बांग्ला साहित्य का पहला सफल ऐतिहासिक उपन्यास माना जाता है। इसका प्रकाशन सन् 1865 में हुआ। यह उपन्यास मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में मुगलों और पठानों के संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें इतिहास, प्रेम, वीरता और त्याग का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
उपन्यास का मुख्य कथानक जगत सिंह, तिलोत्तमा (दुर्गेशनंदिनी) और आयशा के बीच विकसित प्रेम और संघर्ष पर आधारित है। राजपूत वीर जगत सिंह तिलोत्तमा से प्रेम करता है, किंतु परिस्थितियोंवश उसे अनेक कठिनाइयों, युद्धों और षड्यंत्रों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, पठान सेनापति की पुत्री आयशा भी जगत सिंह से प्रेम करती है, परंतु अंततः त्याग और मानवता का आदर्श प्रस्तुत करती है। अनेक संघर्षों और घटनाओं के बाद सत्य, प्रेम और न्याय की विजय होती है तथा जगत सिंह और तिलोत्तमा का मिलन होता है।
इस उपन्यास के माध्यम से बंकिमचंद्र ने वीरता, प्रेम, निष्ठा, त्याग और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रभावशाली चित्रण किया है। 'दुर्गेशनंदिनी' भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा की आधारशिला मानी जाती है और अपनी रोचक कथा, सशक्त चरित्र-चित्रण तथा साहित्यिक गरिमा के कारण आज भी अत्यंत लोकप्रिय है।
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ISBN : 978-81-996879-8-1
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Publication: Kitabking
Description:
दुर्गेशनंदिनी' बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रथम एवं बांग्ला साहित्य का पहला सफल ऐतिहासिक उपन्यास माना जाता है। इसका प्रकाशन सन् 1865 में हुआ। यह उपन्यास मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में मुगलों और पठानों के संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें इतिहास, प्रेम, वीरता और त्याग का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
उपन्यास का मुख्य कथानक जगत सिंह, तिलोत्तमा (दुर्गेशनंदिनी) और आयशा के बीच विकसित प्रेम और संघर्ष पर आधारित है। राजपूत वीर जगत सिंह तिलोत्तमा से प्रेम करता है, किंतु परिस्थितियोंवश उसे अनेक कठिनाइयों, युद्धों और षड्यंत्रों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, पठान सेनापति की पुत्री आयशा भी जगत सिंह से प्रेम करती है, परंतु अंततः त्याग और मानवता का आदर्श प्रस्तुत करती है। अनेक संघर्षों और घटनाओं के बाद सत्य, प्रेम और न्याय की विजय होती है तथा जगत सिंह और तिलोत्तमा का मिलन होता है।
इस उपन्यास के माध्यम से बंकिमचंद्र ने वीरता, प्रेम, निष्ठा, त्याग और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रभावशाली चित्रण किया है। 'दुर्गेशनंदिनी' भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा की आधारशिला मानी जाती है और अपनी रोचक कथा, सशक्त चरित्र-चित्रण तथा साहित्यिक गरिमा के कारण आज भी अत्यंत लोकप्रिय है।