Author: Rahul Sankrityayan
Dimagi Gulami(दिमागी गुलामी)
दिमागी गुलामी एक विचारोत्तेजक कृति है, जिसमें लेखक ने मानसिक दासता, अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और संकीर्ण सोच के दुष्परिणामों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश है कि वास्तविक स्वतंत्रता तभी संभव है, जब व्यक्ति अपने विचारों को तर्क, विज्ञान और विवेक के आधार पर विकसित करे। लेखक शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वतंत्र चिंतन और सामाजिक जागरूकता को प्रगति का आधार मानते हैं। सरल, प्रभावशाली और तार्किक शैली में लिखी गई यह कृति पाठकों को मानसिक बंधनों से मुक्त होकर सत्य, ज्ञान और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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₹ 120.00
₹149
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ISBN : 978-93-7670-936-6
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Publication: Kitabking
Description:
दिमागी गुलामी एक विचारोत्तेजक कृति है, जिसमें लेखक ने मानसिक दासता, अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और संकीर्ण सोच के दुष्परिणामों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश है कि वास्तविक स्वतंत्रता तभी संभव है, जब व्यक्ति अपने विचारों को तर्क, विज्ञान और विवेक के आधार पर विकसित करे। लेखक शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वतंत्र चिंतन और सामाजिक जागरूकता को प्रगति का आधार मानते हैं। सरल, प्रभावशाली और तार्किक शैली में लिखी गई यह कृति पाठकों को मानसिक बंधनों से मुक्त होकर सत्य, ज्ञान और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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