Author: Jaishankar Prasad
Dhruvswamini(ध्रुवस्वामिनी)
'ध्रुवस्वामिनी' ध्रुवस्वामिनी, जयशंकर प्रसाद का अंतिम और सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटक माना जाता है। इसकी कथा गुप्तकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें नारी-स्वाभिमान, स्वतंत्रता, प्रेम, न्याय और मानवीय गरिमा का सशक्त चित्रण किया गया है।
नाटक की नायिका ध्रुवस्वामिनी एक साहसी, स्वाभिमानी और बुद्धिमती स्त्री है। उसका पति रामगुप्त एक कायर और निर्बल शासक है, जो अपने राज्य की रक्षा के लिए अपनी ही रानी को शत्रु के हवाले करने को तैयार हो जाता है। ध्रुवस्वामिनी इस अपमानजनक निर्णय का विरोध करती है और अपने सम्मान तथा स्वतंत्र अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करती है। अंततः सत्य, साहस और न्याय की विजय होती है तथा ध्रुवस्वामिनी अपने स्वाभिमान की रक्षा करने में सफल होती है।
इस नाटक के माध्यम से जयशंकर प्रसाद ने यह संदेश दिया है कि नारी कोई वस्तु नहीं, बल्कि स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली मानव है, जिसे सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए। 'ध्रुवस्वामिनी' केवल एक ऐतिहासिक नाटक नहीं, बल्कि नारी-स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और सामाजिक चेतना का प्रभावशाली घोष भी है। अपनी सशक्त कथावस्तु, प्रभावी संवादों और गहन विचारों के कारण यह हिन्दी साहित्य की अमूल्य कृतियों में गिना जाता है।
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ISBN : 978-93-7670-399-9
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Publication: Kitabking
Description:
'ध्रुवस्वामिनी' ध्रुवस्वामिनी, जयशंकर प्रसाद का अंतिम और सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटक माना जाता है। इसकी कथा गुप्तकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें नारी-स्वाभिमान, स्वतंत्रता, प्रेम, न्याय और मानवीय गरिमा का सशक्त चित्रण किया गया है।
नाटक की नायिका ध्रुवस्वामिनी एक साहसी, स्वाभिमानी और बुद्धिमती स्त्री है। उसका पति रामगुप्त एक कायर और निर्बल शासक है, जो अपने राज्य की रक्षा के लिए अपनी ही रानी को शत्रु के हवाले करने को तैयार हो जाता है। ध्रुवस्वामिनी इस अपमानजनक निर्णय का विरोध करती है और अपने सम्मान तथा स्वतंत्र अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करती है। अंततः सत्य, साहस और न्याय की विजय होती है तथा ध्रुवस्वामिनी अपने स्वाभिमान की रक्षा करने में सफल होती है।
इस नाटक के माध्यम से जयशंकर प्रसाद ने यह संदेश दिया है कि नारी कोई वस्तु नहीं, बल्कि स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली मानव है, जिसे सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए। 'ध्रुवस्वामिनी' केवल एक ऐतिहासिक नाटक नहीं, बल्कि नारी-स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और सामाजिक चेतना का प्रभावशाली घोष भी है। अपनी सशक्त कथावस्तु, प्रभावी संवादों और गहन विचारों के कारण यह हिन्दी साहित्य की अमूल्य कृतियों में गिना जाता है।
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