Author: Dr Kunwar Bechain
Dhoop Chali Miloo Tak(धूप चली मीलों तक)
धूप चली मीलों तक डॉ. कुँवर बेचैन का एक संवेदनशील और प्रेरणादायक काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन के संघर्ष, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, आशा, प्रकृति और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण मिलता है। कवि ने अपनी सहज, सरल और भावपूर्ण भाषा के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों के बीच भी आशा और सकारात्मकता का संदेश दिया है। संग्रह की कविताएँ मनुष्य को निराशा से उबरकर साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
इस कृति में प्रेम को केवल व्यक्तिगत भावना न मानकर मानवता, करुणा और आत्मीयता के व्यापक रूप में प्रस्तुत किया गया है। कवि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता, स्वार्थ, असमानता और मानवीय मूल्यों के ह्रास पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रेम, सहयोग और नैतिकता की आवश्यकता पर बल देते हैं। प्रकृति के विविध रूपों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, परिवर्तनशीलता और निरंतर गतिशीलता को भी प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया गया है।
धूप चली मीलों तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने वाली प्रेरक कृति है। डॉ. कुँवर बेचैन ने अपनी मार्मिक अभिव्यक्ति और गहन संवेदनशीलता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, आशा, प्रेम, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के सहारे जीवन को नई दिशा और सार्थकता प्रदान की जा सकती है। यह कृति पाठकों को आत्मबल, मानवीय मूल्यों और जीवन के प्रति विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
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ISBN : 9789380089218
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Publication: Divyansh Publication
Description:
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धूप चली मीलों तक डॉ. कुँवर बेचैन का एक संवेदनशील और प्रेरणादायक काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन के संघर्ष, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, आशा, प्रकृति और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण मिलता है। कवि ने अपनी सहज, सरल और भावपूर्ण भाषा के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों के बीच भी आशा और सकारात्मकता का संदेश दिया है। संग्रह की कविताएँ मनुष्य को निराशा से उबरकर साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
इस कृति में प्रेम को केवल व्यक्तिगत भावना न मानकर मानवता, करुणा और आत्मीयता के व्यापक रूप में प्रस्तुत किया गया है। कवि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता, स्वार्थ, असमानता और मानवीय मूल्यों के ह्रास पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रेम, सहयोग और नैतिकता की आवश्यकता पर बल देते हैं। प्रकृति के विविध रूपों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, परिवर्तनशीलता और निरंतर गतिशीलता को भी प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया गया है।
धूप चली मीलों तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने वाली प्रेरक कृति है। डॉ. कुँवर बेचैन ने अपनी मार्मिक अभिव्यक्ति और गहन संवेदनशीलता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, आशा, प्रेम, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के सहारे जीवन को नई दिशा और सार्थकता प्रदान की जा सकती है। यह कृति पाठकों को आत्मबल, मानवीय मूल्यों और जीवन के प्रति विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
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