Author: Rabindranath Tagore
Getanjali(गीतांजलि)
गीतांजलि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की विश्वप्रसिद्ध काव्य-कृति है, जिसके लिए उन्हें वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह काव्य-संग्रह आध्यात्मिक चेतना, ईश्वर-भक्ति, प्रकृति-प्रेम और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। इसकी कविताओं में कवि ने ईश्वर को किसी विशेष रूप में नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि, मानवता और प्रकृति में विद्यमान एक सार्वभौमिक शक्ति के रूप में चित्रित किया है। वे मनुष्य को अहंकार, स्वार्थ और भय से मुक्त होकर प्रेम, करुणा, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
कवि के अनुसार जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुख-संपत्ति में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, निःस्वार्थ कर्म और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण में निहित है। गीतांजलि की कविताएँ मानव और ईश्वर के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध को सरल, मधुर और भावपूर्ण भाषा में व्यक्त करती हैं। साथ ही, प्रकृति के सौंदर्य, जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मा की अमरता का भी अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है।
गीतांजलि केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन, आध्यात्मिकता और मानवता का गहन दर्शन है। यह कृति पाठकों को आत्मचिंतन, प्रेम, विनम्रता, सहिष्णुता और विश्वबंधुत्व की प्रेरणा देती है तथा यह संदेश देती है कि सच्चा सुख और ईश्वर की अनुभूति मानव सेवा, सद्कर्म और निष्कलुष हृदय में निहित है।
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ISBN : 9789389245462
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Publication: Divyansh Publication
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गीतांजलि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की विश्वप्रसिद्ध काव्य-कृति है, जिसके लिए उन्हें वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह काव्य-संग्रह आध्यात्मिक चेतना, ईश्वर-भक्ति, प्रकृति-प्रेम और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। इसकी कविताओं में कवि ने ईश्वर को किसी विशेष रूप में नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि, मानवता और प्रकृति में विद्यमान एक सार्वभौमिक शक्ति के रूप में चित्रित किया है। वे मनुष्य को अहंकार, स्वार्थ और भय से मुक्त होकर प्रेम, करुणा, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
कवि के अनुसार जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुख-संपत्ति में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, निःस्वार्थ कर्म और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण में निहित है। गीतांजलि की कविताएँ मानव और ईश्वर के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध को सरल, मधुर और भावपूर्ण भाषा में व्यक्त करती हैं। साथ ही, प्रकृति के सौंदर्य, जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मा की अमरता का भी अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है।
गीतांजलि केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन, आध्यात्मिकता और मानवता का गहन दर्शन है। यह कृति पाठकों को आत्मचिंतन, प्रेम, विनम्रता, सहिष्णुता और विश्वबंधुत्व की प्रेरणा देती है तथा यह संदेश देती है कि सच्चा सुख और ईश्वर की अनुभूति मानव सेवा, सद्कर्म और निष्कलुष हृदय में निहित है।
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