Anandmath(आनंदमठ)

आनंदमठ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं राष्ट्रवादी उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभूमि 1770 के बंगाल के भीषण अकाल और संन्यासी विद्रोह पर आधारित है। उपन्यास में महेंद्र और उनकी पत्नी कल्याणी की कथा के माध्यम से देशभक्ति, त्याग और कर्तव्य की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विपरीत परिस्थितियों में महेंद्र का परिचय संन्यासियों के एक संगठन से होता है, जिसका नेतृत्व सत्यानंद करते हैं। ये संन्यासी मातृभूमि को पराधीनता और अन्याय से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं। उपन्यास में भारतमाता को तीन रूपों—दुर्बल, जागृत और समृद्ध—में चित्रित किया गया है, जो राष्ट्र की वर्तमान स्थिति, संघर्ष और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं। संन्यासियों का अनुशासन, साहस और बलिदान पाठकों में राष्ट्रीय चेतना का संचार करता है। इसी कृति में रचित अमर गीत "वंदे मातरम्" भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना। आनंदमठ केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, आत्मबल, संगठन, त्याग और स्वतंत्रता की भावना का सशक्त घोष है। बंकिमचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश दिया है कि राष्ट्र की उन्नति के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग, एकता और निःस्वार्थ सेवा आवश्यक है। यही कारण है कि यह कृति भारतीय साहित्य और राष्ट्रवादी चेतना की अमूल्य धरोहर मानी जाती है।

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ISBN : 9789389245653

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Publication: Divyansh Publication
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आनंदमठ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं राष्ट्रवादी उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभूमि 1770 के बंगाल के भीषण अकाल और संन्यासी विद्रोह पर आधारित है। उपन्यास में महेंद्र और उनकी पत्नी कल्याणी की कथा के माध्यम से देशभक्ति, त्याग और कर्तव्य की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विपरीत परिस्थितियों में महेंद्र का परिचय संन्यासियों के एक संगठन से होता है, जिसका नेतृत्व सत्यानंद करते हैं। ये संन्यासी मातृभूमि को पराधीनता और अन्याय से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं। उपन्यास में भारतमाता को तीन रूपों—दुर्बल, जागृत और समृद्ध—में चित्रित किया गया है, जो राष्ट्र की वर्तमान स्थिति, संघर्ष और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं। संन्यासियों का अनुशासन, साहस और बलिदान पाठकों में राष्ट्रीय चेतना का संचार करता है। इसी कृति में रचित अमर गीत "वंदे मातरम्" भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना। आनंदमठ केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, आत्मबल, संगठन, त्याग और स्वतंत्रता की भावना का सशक्त घोष है। बंकिमचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश दिया है कि राष्ट्र की उन्नति के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग, एकता और निःस्वार्थ सेवा आवश्यक है। यही कारण है कि यह कृति भारतीय साहित्य और राष्ट्रवादी चेतना की अमूल्य धरोहर मानी जाती है।

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Bankimchandra chattopadhyay

Bankim Chandra Chattopadhyay CIE (anglicised as Bankim Chandra Chatterjee; 26 June 1838[4] – 8 April 1894[5]) was a Bengali novelist, poet, essayist[6] and journalist.[7] He was the author of the 1882 Bengali language novel Anandamath, which is one of the landmarks of modern Bengali and Indian literature. He was the composer of Vande Mataram, written in highly Sanskritised Bengali, personifying India as a mother goddess.
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