Author: Acharya Chatursen Shastri
Dharmorakshti(धर्मोरक्षति)
धर्मोरक्षति' आचार्य चतुरसेन शास्त्री का एक विचारप्रधान उपन्यास है, जिसमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों की महत्ता का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। पुस्तक का मूल संदेश है कि जो व्यक्ति सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा करता है, अंततः वही धर्म उसकी रक्षा करता है। यही भाव प्रसिद्ध उक्ति "धर्मो रक्षति रक्षितः" में भी निहित है।
उपन्यास में लेखक ने दिखाया है कि जब समाज में स्वार्थ, अन्याय, लालच और अधर्म बढ़ने लगते हैं, तब धर्म का वास्तविक स्वरूप संकट में पड़ जाता है। ऐसे समय में साहसी और सिद्धांतनिष्ठ व्यक्तियों का कर्तव्य है कि वे सत्य और न्याय का साथ दें, चाहे इसके लिए उन्हें कठिनाइयों और संघर्षों का सामना ही क्यों न करना पड़े।
आचार्य चतुरसेन ने अपनी प्रभावशाली भाषा और ऐतिहासिक दृष्टि के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि धर्म केवल कर्मकांड या बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सदाचार, करुणा, नैतिकता और मानव कल्याण का मार्ग है। यह कृति पाठकों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने तथा जीवन में सत्य, ईमानदारी और न्याय के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है। 'धर्मोरक्षति' एक प्रेरणादायक रचना है, जो मानव जीवन में धर्म और नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता को प्रभावशाली ढंग से स्थापित करती है।
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ISBN : 978-93-7670-478-1
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Publication: Kitabking
Description:
धर्मोरक्षति' आचार्य चतुरसेन शास्त्री का एक विचारप्रधान उपन्यास है, जिसमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों की महत्ता का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। पुस्तक का मूल संदेश है कि जो व्यक्ति सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा करता है, अंततः वही धर्म उसकी रक्षा करता है। यही भाव प्रसिद्ध उक्ति "धर्मो रक्षति रक्षितः" में भी निहित है।
उपन्यास में लेखक ने दिखाया है कि जब समाज में स्वार्थ, अन्याय, लालच और अधर्म बढ़ने लगते हैं, तब धर्म का वास्तविक स्वरूप संकट में पड़ जाता है। ऐसे समय में साहसी और सिद्धांतनिष्ठ व्यक्तियों का कर्तव्य है कि वे सत्य और न्याय का साथ दें, चाहे इसके लिए उन्हें कठिनाइयों और संघर्षों का सामना ही क्यों न करना पड़े।
आचार्य चतुरसेन ने अपनी प्रभावशाली भाषा और ऐतिहासिक दृष्टि के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि धर्म केवल कर्मकांड या बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सदाचार, करुणा, नैतिकता और मानव कल्याण का मार्ग है। यह कृति पाठकों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने तथा जीवन में सत्य, ईमानदारी और न्याय के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है। 'धर्मोरक्षति' एक प्रेरणादायक रचना है, जो मानव जीवन में धर्म और नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता को प्रभावशाली ढंग से स्थापित करती है।
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