Dharamputra(धर्मपुत्र)

धर्मपुत्र' आचार्य चतुरसेन शास्त्री का एक सामाजिक एवं विचारप्रधान उपन्यास है, जिसमें धर्म, संस्कार, मानवता और नैतिक मूल्यों के बीच के संबंधों का मार्मिक चित्रण किया गया है। लेखक ने यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति की महानता उसके जन्म, जाति या धर्म से नहीं, बल्कि उसके आचरण, चरित्र और कर्मों से निर्धारित होती है।

उपन्यास में पात्रों के माध्यम से समाज में व्याप्त धार्मिक संकीर्णता, जातिगत भेदभाव, रूढ़ियों और सामाजिक असमानताओं को उजागर किया गया है। कहानी आगे बढ़ते हुए यह स्पष्ट करती है कि सच्चा धर्म प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और मानव सेवा में निहित है। जब मनुष्य धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलता है, तभी वह समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनता है।

आचार्य चतुरसेन ने सरल, प्रभावशाली और विचारोत्तेजक शैली में यह दिखाया है कि मानवता सभी धर्मों से श्रेष्ठ है तथा नैतिक जीवन ही वास्तविक धार्मिक जीवन है। यह उपन्यास पाठकों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर समानता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। 'धर्मपुत्र' सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और आदर्श जीवन-दृष्टि को प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है।

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ISBN : 978-93-7670-242-8

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Publication: Kitabking
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धर्मपुत्र' आचार्य चतुरसेन शास्त्री का एक सामाजिक एवं विचारप्रधान उपन्यास है, जिसमें धर्म, संस्कार, मानवता और नैतिक मूल्यों के बीच के संबंधों का मार्मिक चित्रण किया गया है। लेखक ने यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति की महानता उसके जन्म, जाति या धर्म से नहीं, बल्कि उसके आचरण, चरित्र और कर्मों से निर्धारित होती है।

उपन्यास में पात्रों के माध्यम से समाज में व्याप्त धार्मिक संकीर्णता, जातिगत भेदभाव, रूढ़ियों और सामाजिक असमानताओं को उजागर किया गया है। कहानी आगे बढ़ते हुए यह स्पष्ट करती है कि सच्चा धर्म प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और मानव सेवा में निहित है। जब मनुष्य धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलता है, तभी वह समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनता है।

आचार्य चतुरसेन ने सरल, प्रभावशाली और विचारोत्तेजक शैली में यह दिखाया है कि मानवता सभी धर्मों से श्रेष्ठ है तथा नैतिक जीवन ही वास्तविक धार्मिक जीवन है। यह उपन्यास पाठकों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर समानता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। 'धर्मपुत्र' सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और आदर्श जीवन-दृष्टि को प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है।

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Acharya Chatursen Shastri

Acharya Chatursen Shastri (1891–1960) was one of the most distinguished writers of Hindi literature. A scholar of Ayurveda, history, religion, and Indian culture, he authored more than 200 books, including novels, stories, essays, and historical works. His writings are known for their deep research, vivid storytelling, and insightful portrayal of India\'s past. Some of his most celebrated novels include Vaishali Ki Nagarvadhu, Somnath, and Vayam Rakshamah. Through his literary contributions, Acharya Chatursen played a significant role in enriching Hindi literature and promoting India\'s cultural heritage.\r\n
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