Devki Ka Beta(देवकी का बेटा)

देवकी का बेटा' रांगेय राघव का प्रसिद्ध पौराणिक-ऐतिहासिक उपन्यास है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल्यकाल और व्यक्तित्व को मानवीय एवं यथार्थवादी दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने पौराणिक कथाओं को केवल धार्मिक आख्यान के रूप में नहीं, बल्कि तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के संदर्भ में चित्रित किया है।

उपन्यास की कथा देवकी और वासुदेव के कारावास से आरंभ होती है। अत्याचारी राजा कंस को भविष्यवाणी होती है कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। भयवश वह देवकी के पुत्रों की हत्या कर देता है, किंतु आठवें पुत्र श्रीकृष्ण को वासुदेव गोकुल पहुँचा देते हैं, जहाँ उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद के घर होता है। बाल्यकाल से ही कृष्ण अपनी बुद्धिमत्ता, साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हैं। बड़े होकर वे मथुरा लौटते हैं, कंस का वध करते हैं और जनता को उसके अत्याचारों से मुक्त कराते हैं।

यह उपन्यास अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य की विजय, कर्तव्य, साहस और लोककल्याण का संदेश देता है। रांगेय राघव ने श्रीकृष्ण के चरित्र को अलौकिक चमत्कारों से अधिक एक महान, दूरदर्शी और जननायक के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे यह कृति साहित्यिक और वैचारिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है।

 
 

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ISBN : 978-93-7670-482-8

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Publication: Kitabking
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देवकी का बेटा' रांगेय राघव का प्रसिद्ध पौराणिक-ऐतिहासिक उपन्यास है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल्यकाल और व्यक्तित्व को मानवीय एवं यथार्थवादी दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने पौराणिक कथाओं को केवल धार्मिक आख्यान के रूप में नहीं, बल्कि तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के संदर्भ में चित्रित किया है।

उपन्यास की कथा देवकी और वासुदेव के कारावास से आरंभ होती है। अत्याचारी राजा कंस को भविष्यवाणी होती है कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। भयवश वह देवकी के पुत्रों की हत्या कर देता है, किंतु आठवें पुत्र श्रीकृष्ण को वासुदेव गोकुल पहुँचा देते हैं, जहाँ उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद के घर होता है। बाल्यकाल से ही कृष्ण अपनी बुद्धिमत्ता, साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हैं। बड़े होकर वे मथुरा लौटते हैं, कंस का वध करते हैं और जनता को उसके अत्याचारों से मुक्त कराते हैं।

यह उपन्यास अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य की विजय, कर्तव्य, साहस और लोककल्याण का संदेश देता है। रांगेय राघव ने श्रीकृष्ण के चरित्र को अलौकिक चमत्कारों से अधिक एक महान, दूरदर्शी और जननायक के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे यह कृति साहित्यिक और वैचारिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है।

 
 

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Ranghe Raghav

रांगेय राघव (1923–1962) हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार, कथाकार, नाटककार और आलोचक थे। उन्होंने इतिहास, समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित अनेक उत्कृष्ट रचनाएँ लिखीं। कम आयु में ही उन्होंने हिंदी साहित्य को महत्वपूर्ण योगदान दिया और वे अपनी यथार्थवादी एवं प्रभावशाली लेखन शैली के लिए प्रसिद्ध हैं।
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