Devi Chaudharani(देवी चौधरानी)

'देवी चौधरानी' बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सामाजिक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1884 में हुआ। यह उपन्यास एक साधारण, उपेक्षित स्त्री के साहस, आत्मसम्मान, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की प्रेरक गाथा प्रस्तुत करता है।

उपन्यास की नायिका प्रफुल्ला एक गरीब ब्राह्मण परिवार की युवती है, जिसका विवाह सम्पन्न जमींदार परिवार में होता है। किन्तु परिस्थितियों के कारण उसके ससुर उसे स्वीकार नहीं करते और वह अपमान तथा गरीबी का जीवन जीने को विवश हो जाती है। अनेक कठिनाइयों के बाद उसकी भेंट भवानी पाठक से होती है, जो उसे शिक्षा, युद्धकला, प्रशासन और नेतृत्व का प्रशिक्षण देते हैं। धीरे-धीरे प्रफुल्ला 'देवी चौधरानी' के रूप में प्रसिद्ध हो जाती है। वह अत्याचारी जमींदारों और अंग्रेज अधिकारियों से धन लेकर गरीबों की सहायता करती है तथा न्याय और लोककल्याण के कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर देती है। उसकी बुद्धिमत्ता, साहस और संगठन-शक्ति के कारण वह जनता की प्रिय नेता बन जाती है। अंततः वह अपने परिवार से पुनः मिलती है और अपने विवेक, उदारता तथा आदर्शों के माध्यम से समाज और परिवार दोनों में सुधार लाती है।

यह उपन्यास नारी-सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति का सशक्त संदेश देता है। बंकिमचन्द्र ने देवी चौधरानी के चरित्र के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि अवसर, शिक्षा और दृढ़ संकल्प मिलने पर एक साधारण स्त्री भी समाज और राष्ट्र के लिए असाधारण कार्य कर सकती है।

₹ 200.00 ₹249

Inclusive of all taxes

ISBN : 978-81-996879-1-2

  • 1

    Warranty

  • 1 Guarantee

  • COD Avilable

  • Returnable

  • cancelable

SKU: KK-DVC
Publication: Kitabking
Description:

'देवी चौधरानी' बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सामाजिक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1884 में हुआ। यह उपन्यास एक साधारण, उपेक्षित स्त्री के साहस, आत्मसम्मान, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की प्रेरक गाथा प्रस्तुत करता है।

उपन्यास की नायिका प्रफुल्ला एक गरीब ब्राह्मण परिवार की युवती है, जिसका विवाह सम्पन्न जमींदार परिवार में होता है। किन्तु परिस्थितियों के कारण उसके ससुर उसे स्वीकार नहीं करते और वह अपमान तथा गरीबी का जीवन जीने को विवश हो जाती है। अनेक कठिनाइयों के बाद उसकी भेंट भवानी पाठक से होती है, जो उसे शिक्षा, युद्धकला, प्रशासन और नेतृत्व का प्रशिक्षण देते हैं। धीरे-धीरे प्रफुल्ला 'देवी चौधरानी' के रूप में प्रसिद्ध हो जाती है। वह अत्याचारी जमींदारों और अंग्रेज अधिकारियों से धन लेकर गरीबों की सहायता करती है तथा न्याय और लोककल्याण के कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर देती है। उसकी बुद्धिमत्ता, साहस और संगठन-शक्ति के कारण वह जनता की प्रिय नेता बन जाती है। अंततः वह अपने परिवार से पुनः मिलती है और अपने विवेक, उदारता तथा आदर्शों के माध्यम से समाज और परिवार दोनों में सुधार लाती है।

यह उपन्यास नारी-सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति का सशक्त संदेश देता है। बंकिमचन्द्र ने देवी चौधरानी के चरित्र के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि अवसर, शिक्षा और दृढ़ संकल्प मिलने पर एक साधारण स्त्री भी समाज और राष्ट्र के लिए असाधारण कार्य कर सकती है।

Submit a Review

Write Your Review

0 Review Of Product Devi Chaudharani(देवी चौधरानी)

Forgot Password?
OR

No account Yet?