Devdas(देवदास)

देवदास शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का अत्यंत प्रसिद्ध सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें प्रेम, सामाजिक बंधनों, अहंकार और आत्मविनाश की मार्मिक कथा प्रस्तुत की गई है। उपन्यास का नायक देवदास और पार्वती (पारो) बचपन के साथी होते हैं तथा एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते हैं। किंतु परिवारों के सामाजिक भेद, प्रतिष्ठा और देवदास की निर्णयहीनता के कारण उनका विवाह नहीं हो पाता। पारो का विवाह एक संपन्न परिवार में हो जाता है, जबकि देवदास इस वियोग को सहन नहीं कर पाता और निराशा में डूबकर मदिरापान का आदी बन जाता है। देवदास के जीवन में चंद्रमुखी नामक एक गणिका आती है, जो उसके प्रति निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का भाव रखती है। वह देवदास को नई दिशा देने का प्रयास करती है, किंतु देवदास अपने अतीत, कमजोरी और आत्मग्लानि से मुक्त नहीं हो पाता। अंततः वह जीवन के अंतिम क्षणों में पारो से मिलने पहुँचता है, परंतु उससे मिल पाने से पहले ही उसके घर के बाहर उसकी मृत्यु हो जाती है। देवदास केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों, वर्गभेद, पारिवारिक प्रतिष्ठा और मानवीय दुर्बलताओं का गहन चित्रण है। शरतचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश दिया है कि साहस, सही समय पर लिया गया निर्णय और आत्मसंयम जीवन को सफल बनाते हैं, जबकि संकोच, अहंकार और पलायन व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाते हैं।

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ISBN : 9789389245561

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Publication: Divyansh Publication
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देवदास शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का अत्यंत प्रसिद्ध सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें प्रेम, सामाजिक बंधनों, अहंकार और आत्मविनाश की मार्मिक कथा प्रस्तुत की गई है। उपन्यास का नायक देवदास और पार्वती (पारो) बचपन के साथी होते हैं तथा एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते हैं। किंतु परिवारों के सामाजिक भेद, प्रतिष्ठा और देवदास की निर्णयहीनता के कारण उनका विवाह नहीं हो पाता। पारो का विवाह एक संपन्न परिवार में हो जाता है, जबकि देवदास इस वियोग को सहन नहीं कर पाता और निराशा में डूबकर मदिरापान का आदी बन जाता है। देवदास के जीवन में चंद्रमुखी नामक एक गणिका आती है, जो उसके प्रति निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का भाव रखती है। वह देवदास को नई दिशा देने का प्रयास करती है, किंतु देवदास अपने अतीत, कमजोरी और आत्मग्लानि से मुक्त नहीं हो पाता। अंततः वह जीवन के अंतिम क्षणों में पारो से मिलने पहुँचता है, परंतु उससे मिल पाने से पहले ही उसके घर के बाहर उसकी मृत्यु हो जाती है। देवदास केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों, वर्गभेद, पारिवारिक प्रतिष्ठा और मानवीय दुर्बलताओं का गहन चित्रण है। शरतचंद्र ने इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश दिया है कि साहस, सही समय पर लिया गया निर्णय और आत्मसंयम जीवन को सफल बनाते हैं, जबकि संकोच, अहंकार और पलायन व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाते हैं।

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Sarat Chandra Chattopadhyay

Sarat Chandra Chattopadhyay (1876–1938) was one of the most celebrated Bengali novelists and short-story writers in Indian literature. Known for his simple yet powerful style, he portrayed the lives, emotions, and struggles of ordinary people, especially women and the underprivileged. His works often addressed social issues such as caste discrimination, child marriage, and gender inequality. Some of his most famous novels include Devdas, Parineeta, Srikanta, and Pather Dabi. His writings continue to inspire readers and have been translated into many languages, making him one of the most influential literary figures in India.\r\n
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