Chotee Kee Pakad(चोटी की पकड़)

चोटी की पकड़ Suryakant Tripathi 'Nirala' का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन समाज की रूढ़िवादी सोच, धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और सामाजिक विसंगतियों का यथार्थ चित्रण किया गया है। लेखक ने पात्रों और घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया है कि अंधविश्वास, संकीर्णता और परंपराओं का अंधानुकरण व्यक्ति और समाज के विकास में बाधक बनता है। प्रभावशाली भाषा और व्यंग्यात्मक शैली से युक्त यह उपन्यास विवेक, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और मानवीय समानता का संदेश देता है। यह कृति पाठकों को रूढ़ियों से ऊपर उठकर तर्कपूर्ण एवं प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।

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ISBN : 978-93-7670-443-9

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SKU: KK-CKP
Publication: Kitabkng
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चोटी की पकड़ Suryakant Tripathi 'Nirala' का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन समाज की रूढ़िवादी सोच, धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और सामाजिक विसंगतियों का यथार्थ चित्रण किया गया है। लेखक ने पात्रों और घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया है कि अंधविश्वास, संकीर्णता और परंपराओं का अंधानुकरण व्यक्ति और समाज के विकास में बाधक बनता है। प्रभावशाली भाषा और व्यंग्यात्मक शैली से युक्त यह उपन्यास विवेक, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और मानवीय समानता का संदेश देता है। यह कृति पाठकों को रूढ़ियों से ऊपर उठकर तर्कपूर्ण एवं प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।

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Suryakant Tripathi Nirala

Suryakant Tripathi \'Nirala\' हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे महान कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता, करुणा और विद्रोह की भावना का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने हिन्दी कविता को नई भाषा, नवीन शिल्प और स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी प्रमुख कृतियों में परिमल, अनामिका, सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सरल, संवेदनशील और ओजस्वी लेखन के कारण निराला हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रभावशाली रचनाकारों में गिने जाते हैं और आज भी उनकी रचनाएँ पाठकों को प्रेरित करती हैं।
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