Author: Jaishankar Prasad
Chandragupt(चन्द्रगुप्त)
'चन्द्रगुप्त' नाटक की कथा उस समय की है जब भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और मगध पर अत्याचारी नंद वंश का शासन था। विदेशी आक्रमणों तथा राजाओं के आपसी संघर्षों के कारण देश की एकता और सुरक्षा संकट में पड़ गई थी। ऐसे समय में महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने योग्य, साहसी और राष्ट्रभक्त युवक चन्द्रगुप्त को अपना शिष्य बनाया तथा उसे युद्ध, राजनीति और शासन की शिक्षा दी।
चाणक्य की रणनीति और चन्द्रगुप्त के पराक्रम से नंद वंश का अंत होता है तथा मगध में मौर्य साम्राज्य की स्थापना होती है। नाटक में सिकंदर के आक्रमण, भारतीय राज्यों की स्थिति, राष्ट्रीय एकता और स्वाधीनता की भावना का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। पात्रों के संवाद वीरता, नीति, त्याग और देशप्रेम से ओत-प्रोत हैं। चन्द्रगुप्त एक आदर्श शासक के रूप में उभरता है, जबकि चाणक्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले दूरदर्शी राजनीतिज्ञ के रूप में दिखाई देते हैं।
यह नाटक केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि संगठित राष्ट्र, योग्य नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से किसी भी संकट पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
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ISBN : 978-93-7670-178-0
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Publication: Kitabking
Description:
'चन्द्रगुप्त' नाटक की कथा उस समय की है जब भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और मगध पर अत्याचारी नंद वंश का शासन था। विदेशी आक्रमणों तथा राजाओं के आपसी संघर्षों के कारण देश की एकता और सुरक्षा संकट में पड़ गई थी। ऐसे समय में महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने योग्य, साहसी और राष्ट्रभक्त युवक चन्द्रगुप्त को अपना शिष्य बनाया तथा उसे युद्ध, राजनीति और शासन की शिक्षा दी।
चाणक्य की रणनीति और चन्द्रगुप्त के पराक्रम से नंद वंश का अंत होता है तथा मगध में मौर्य साम्राज्य की स्थापना होती है। नाटक में सिकंदर के आक्रमण, भारतीय राज्यों की स्थिति, राष्ट्रीय एकता और स्वाधीनता की भावना का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। पात्रों के संवाद वीरता, नीति, त्याग और देशप्रेम से ओत-प्रोत हैं। चन्द्रगुप्त एक आदर्श शासक के रूप में उभरता है, जबकि चाणक्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले दूरदर्शी राजनीतिज्ञ के रूप में दिखाई देते हैं।
यह नाटक केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि संगठित राष्ट्र, योग्य नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से किसी भी संकट पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
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