Billesur Bakariha(बिल्लेसुर बकरिहा)

बिल्लेसुर बकरिहा Suryakant Tripathi 'Nirala' का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है। इसमें ग्रामीण जीवन, सामाजिक रूढ़ियों, जातिगत भेदभाव, अंधविश्वास और आर्थिक विषमताओं का सशक्त एवं यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास का नायक बिल्लेसुर अपनी बुद्धिमत्ता, परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करता है। लेखक ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए मानवीय गरिमा, आत्मसम्मान और विवेक का संदेश दिया है। सरल, रोचक और प्रभावशाली शैली में लिखी गई यह कृति हिन्दी साहित्य की श्रेष्ठ सामाजिक-व्यंग्य रचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

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ISBN : 978-93-7670-837-6

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Publication: Kitabking
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बिल्लेसुर बकरिहा Suryakant Tripathi 'Nirala' का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है। इसमें ग्रामीण जीवन, सामाजिक रूढ़ियों, जातिगत भेदभाव, अंधविश्वास और आर्थिक विषमताओं का सशक्त एवं यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास का नायक बिल्लेसुर अपनी बुद्धिमत्ता, परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करता है। लेखक ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए मानवीय गरिमा, आत्मसम्मान और विवेक का संदेश दिया है। सरल, रोचक और प्रभावशाली शैली में लिखी गई यह कृति हिन्दी साहित्य की श्रेष्ठ सामाजिक-व्यंग्य रचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

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Suryakant Tripathi Nirala

Suryakant Tripathi \'Nirala\' हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे महान कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता, करुणा और विद्रोह की भावना का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने हिन्दी कविता को नई भाषा, नवीन शिल्प और स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी प्रमुख कृतियों में परिमल, अनामिका, सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सरल, संवेदनशील और ओजस्वी लेखन के कारण निराला हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रभावशाली रचनाकारों में गिने जाते हैं और आज भी उनकी रचनाएँ पाठकों को प्रेरित करती हैं।
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