Author: Bhagat Singh
Mai Nastik Kyun Hu(मैं नास्तिक क्यों हूँ)
'मैं नास्तिक क्यों हूँ' शहीद भगत सिंह का प्रसिद्ध वैचारिक निबंध है, जिसमें उन्होंने अपने नास्तिक बनने के कारणों को तर्कपूर्ण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। यह लेख उन्होंने जेल में रहते हुए उन लोगों के उत्तर में लिखा था, जो उनके नास्तिक होने को अहंकार या प्रसिद्धि का परिणाम मानते थे। भगत सिंह स्पष्ट करते हैं कि उनका नास्तिक होना किसी विद्रोह या दिखावे का परिणाम नहीं, बल्कि गहन अध्ययन, चिंतन और विवेकपूर्ण निष्कर्ष का फल है। वे मानते हैं कि मनुष्य को अंधविश्वास, भाग्यवाद और चमत्कारों पर निर्भर रहने के बजाय अपने कर्म, बुद्धि और वैज्ञानिक सोच पर विश्वास करना चाहिए। निबंध में वे यह भी कहते हैं कि कठिन परिस्थितियों, विशेषकर मृत्यु के निकट होने पर भी उन्होंने ईश्वर की शरण नहीं ली, क्योंकि उनके विचार तर्क और सत्य पर आधारित थे। उनके अनुसार साहस, आत्मविश्वास और मानवता ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यह रचना धार्मिक आस्था का अपमान नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र चिंतन, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति और विवेकपूर्ण जीवन-दृष्टि का समर्थन करती है। 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' आज भी युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, सामाजिक चेतना और वैचारिक स्वतंत्रता अपनाने की प्रेरणा देने वाली अत्यंत प्रभावशाली कृति मानी जाती है।
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ISBN : 9789389245530
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Publication: Divyansh Publication
Description:
'मैं नास्तिक क्यों हूँ' शहीद भगत सिंह का प्रसिद्ध वैचारिक निबंध है, जिसमें उन्होंने अपने नास्तिक बनने के कारणों को तर्कपूर्ण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। यह लेख उन्होंने जेल में रहते हुए उन लोगों के उत्तर में लिखा था, जो उनके नास्तिक होने को अहंकार या प्रसिद्धि का परिणाम मानते थे। भगत सिंह स्पष्ट करते हैं कि उनका नास्तिक होना किसी विद्रोह या दिखावे का परिणाम नहीं, बल्कि गहन अध्ययन, चिंतन और विवेकपूर्ण निष्कर्ष का फल है। वे मानते हैं कि मनुष्य को अंधविश्वास, भाग्यवाद और चमत्कारों पर निर्भर रहने के बजाय अपने कर्म, बुद्धि और वैज्ञानिक सोच पर विश्वास करना चाहिए। निबंध में वे यह भी कहते हैं कि कठिन परिस्थितियों, विशेषकर मृत्यु के निकट होने पर भी उन्होंने ईश्वर की शरण नहीं ली, क्योंकि उनके विचार तर्क और सत्य पर आधारित थे। उनके अनुसार साहस, आत्मविश्वास और मानवता ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यह रचना धार्मिक आस्था का अपमान नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र चिंतन, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति और विवेकपूर्ण जीवन-दृष्टि का समर्थन करती है। 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' आज भी युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, सामाजिक चेतना और वैचारिक स्वतंत्रता अपनाने की प्रेरणा देने वाली अत्यंत प्रभावशाली कृति मानी जाती है।
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