Gandhi Ki Aatmkatha(गांधी की आत्मकथा)

गांधी की आत्मकथा, जिसका मूल शीर्षक "सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा" है, महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और आत्मसंघर्ष का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने बचपन, पारिवारिक जीवन, शिक्षा, इंग्लैंड प्रवास, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अनुभव तथा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका का सरल और सत्यनिष्ठ वर्णन किया है। गांधीजी अपने जीवन की सफलताओं के साथ-साथ अपनी गलतियों और कमजोरियों को भी बिना किसी संकोच के स्वीकार करते हैं, जिससे यह आत्मकथा अत्यंत प्रेरणादायक बन जाती है। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम, सादगी और नैतिकता के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। गांधीजी ने अपने जीवन में किए गए विभिन्न प्रयोगों—जैसे सत्य, ब्रह्मचर्य, उपवास, स्वावलंबन और सेवा—का विस्तार से वर्णन किया है तथा यह स्पष्ट किया है कि आत्मशुद्धि और समाजसेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। वे मानते हैं कि चरित्र निर्माण और आत्मानुशासन किसी भी महान कार्य की आधारशिला हैं। यह आत्मकथा केवल गांधीजी के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि सत्य, नैतिकता और मानवता पर आधारित जीवन-दर्शन का प्रेरक ग्रंथ है। यह पाठकों को आत्मचिंतन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देती है तथा यह संदेश देती है कि सत्य और अहिंसा की शक्ति से बड़े से बड़े परिवर्तन संभव हैं।

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ISBN : 9789380089584

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Publication: Divyansh Publication
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गांधी की आत्मकथा, जिसका मूल शीर्षक "सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा" है, महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और आत्मसंघर्ष का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने बचपन, पारिवारिक जीवन, शिक्षा, इंग्लैंड प्रवास, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अनुभव तथा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका का सरल और सत्यनिष्ठ वर्णन किया है। गांधीजी अपने जीवन की सफलताओं के साथ-साथ अपनी गलतियों और कमजोरियों को भी बिना किसी संकोच के स्वीकार करते हैं, जिससे यह आत्मकथा अत्यंत प्रेरणादायक बन जाती है। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम, सादगी और नैतिकता के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। गांधीजी ने अपने जीवन में किए गए विभिन्न प्रयोगों—जैसे सत्य, ब्रह्मचर्य, उपवास, स्वावलंबन और सेवा—का विस्तार से वर्णन किया है तथा यह स्पष्ट किया है कि आत्मशुद्धि और समाजसेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। वे मानते हैं कि चरित्र निर्माण और आत्मानुशासन किसी भी महान कार्य की आधारशिला हैं। यह आत्मकथा केवल गांधीजी के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि सत्य, नैतिकता और मानवता पर आधारित जीवन-दर्शन का प्रेरक ग्रंथ है। यह पाठकों को आत्मचिंतन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देती है तथा यह संदेश देती है कि सत्य और अहिंसा की शक्ति से बड़े से बड़े परिवर्तन संभव हैं।

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Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi (1869–1948), popularly known as the Father of the Nation in India, was a great leader, social reformer, and advocate of peace. He led India\'s struggle for independence from British rule through the principles of truth (Satya) and non-violence (Ahimsa). Gandhi inspired millions with his simple lifestyle, moral courage, and commitment to justice. His philosophy of peaceful resistance influenced civil rights movements around the world and continues to inspire people to work for peace, equality, and human dignity.\r\n
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