Author: OSHO
Satya Ke Agni Phool(सत्य के अग्नि फूल)
ओशो बताते हैं कि मनुष्य का मन लगातार विचारों, इच्छाओं, भय, महत्वाकांक्षाओं और स्मृतियों से घिरा रहता है। यही मानसिक शोर उसे वर्तमान क्षण से दूर कर देता है। ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को बिना किसी निर्णय के देखना सीख सकता है। जब देखने वाला केवल साक्षी बन जाता है, तब धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है और चेतना में एक नई स्पष्टता जन्म लेती है।
पुस्तक में प्रेम को भी जीवन की महत्वपूर्ण अनुभूति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ओशो के अनुसार सच्चा प्रेम अधिकार, अपेक्षा और भय पर आधारित नहीं होता, बल्कि स्वतंत्रता और समझ से उत्पन्न होता है। इसी प्रकार वे जीवन को किसी निश्चित ढाँचे में बाँधने के बजाय उसे पूरी जागरूकता और सहजता के साथ जीने की प्रेरणा देते हैं।
‘सत्य के अग्नि फूल’ का मूल संदेश आत्म-अन्वेषण और जागरूक जीवन है। ओशो पाठक को किसी विचार को केवल इसलिए स्वीकार करने के बजाय स्वयं अनुभव करके सत्य को पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं। यह पुस्तक व्यक्ति को बाहरी दिखावे से हटकर अपने भीतर झाँकने, स्वयं को समझने और अधिक स्वतंत्र, शांत तथा जागरूक जीवन की ओर बढ़ने का संदेश देती है।
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₹349
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ISBN : 9788190404693
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Publication: Divyansh Publications
Description:
ओशो बताते हैं कि मनुष्य का मन लगातार विचारों, इच्छाओं, भय, महत्वाकांक्षाओं और स्मृतियों से घिरा रहता है। यही मानसिक शोर उसे वर्तमान क्षण से दूर कर देता है। ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को बिना किसी निर्णय के देखना सीख सकता है। जब देखने वाला केवल साक्षी बन जाता है, तब धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है और चेतना में एक नई स्पष्टता जन्म लेती है।
पुस्तक में प्रेम को भी जीवन की महत्वपूर्ण अनुभूति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ओशो के अनुसार सच्चा प्रेम अधिकार, अपेक्षा और भय पर आधारित नहीं होता, बल्कि स्वतंत्रता और समझ से उत्पन्न होता है। इसी प्रकार वे जीवन को किसी निश्चित ढाँचे में बाँधने के बजाय उसे पूरी जागरूकता और सहजता के साथ जीने की प्रेरणा देते हैं।
‘सत्य के अग्नि फूल’ का मूल संदेश आत्म-अन्वेषण और जागरूक जीवन है। ओशो पाठक को किसी विचार को केवल इसलिए स्वीकार करने के बजाय स्वयं अनुभव करके सत्य को पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं। यह पुस्तक व्यक्ति को बाहरी दिखावे से हटकर अपने भीतर झाँकने, स्वयं को समझने और अधिक स्वतंत्र, शांत तथा जागरूक जीवन की ओर बढ़ने का संदेश देती है।
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