Author: OSHO
Kathoupnishad(कठोपनिषद) HB
'कठोपनिषद' ओशो द्वारा प्रस्तुत एक गहन आध्यात्मिक व्याख्या है, जिसमें प्राचीन कठोपनिषद के माध्यम से जीवन, मृत्यु, आत्मा, सत्य और परम अस्तित्व जैसे प्रश्नों पर विचार किया गया है। ओशो उपनिषद की कथा को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे मनुष्य की आंतरिक यात्रा और आत्म-बोध का मार्ग मानते हैं।
कठोपनिषद की मूल कथा नचिकेता और यमराज के संवाद पर आधारित है। नचिकेता एक जिज्ञासु और सत्य की खोज करने वाला बालक है, जो अपने पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ में दान की वास्तविकता पर प्रश्न उठाता है। पिता के क्रोध में उसे यमराज के पास जाने का आदेश मिलता है। नचिकेता यमलोक पहुँचकर भी सत्य जानने की अपनी जिज्ञासा से पीछे नहीं हटता। यमराज उसे सांसारिक सुख, धन और दीर्घ जीवन जैसी अनेक वस्तुओं का प्रलोभन देते हैं, लेकिन नचिकेता इन सबको अस्थायी मानकर आत्मा और मृत्यु के रहस्य को जानना चाहता है।
ओशो के अनुसार नचिकेता का चरित्र उस मनुष्य का प्रतीक है जो जीवन के सामान्य आकर्षणों से संतुष्ट नहीं होता और अंतिम सत्य की खोज करता है। यमराज द्वारा दिए गए उपदेशों में श्रेय और प्रेय का अंतर विशेष महत्व रखता है। प्रेय वह है जो तत्काल सुख देता है, जबकि श्रेय वह मार्ग है जो मनुष्य को वास्तविक कल्याण और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। मनुष्य की परीक्षा इसी चुनाव में होती है।
ओशो आत्मा को शरीर और मन से परे स्थित चेतना के रूप में समझाते हैं। शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व मृत्यु से परे है। वे ध्यान, जागरूकता और भीतर की यात्रा को आत्म-साक्षात्कार का माध्यम बताते हैं।
'कठोपनिषद' का केंद्रीय संदेश है कि मृत्यु से भयभीत होने के बजाय उसके सत्य को समझना चाहिए। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब भय, मोह और अज्ञान समाप्त होने लगते हैं। ओशो की व्याख्या पाठक को बाहरी दुनिया से भीतर की ओर जाने और आत्मज्ञान के माध्यम से जीवन के परम सत्य को जानने की प्रेरणा देती है।
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Description:
'कठोपनिषद' ओशो द्वारा प्रस्तुत एक गहन आध्यात्मिक व्याख्या है, जिसमें प्राचीन कठोपनिषद के माध्यम से जीवन, मृत्यु, आत्मा, सत्य और परम अस्तित्व जैसे प्रश्नों पर विचार किया गया है। ओशो उपनिषद की कथा को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे मनुष्य की आंतरिक यात्रा और आत्म-बोध का मार्ग मानते हैं।
कठोपनिषद की मूल कथा नचिकेता और यमराज के संवाद पर आधारित है। नचिकेता एक जिज्ञासु और सत्य की खोज करने वाला बालक है, जो अपने पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ में दान की वास्तविकता पर प्रश्न उठाता है। पिता के क्रोध में उसे यमराज के पास जाने का आदेश मिलता है। नचिकेता यमलोक पहुँचकर भी सत्य जानने की अपनी जिज्ञासा से पीछे नहीं हटता। यमराज उसे सांसारिक सुख, धन और दीर्घ जीवन जैसी अनेक वस्तुओं का प्रलोभन देते हैं, लेकिन नचिकेता इन सबको अस्थायी मानकर आत्मा और मृत्यु के रहस्य को जानना चाहता है।
ओशो के अनुसार नचिकेता का चरित्र उस मनुष्य का प्रतीक है जो जीवन के सामान्य आकर्षणों से संतुष्ट नहीं होता और अंतिम सत्य की खोज करता है। यमराज द्वारा दिए गए उपदेशों में श्रेय और प्रेय का अंतर विशेष महत्व रखता है। प्रेय वह है जो तत्काल सुख देता है, जबकि श्रेय वह मार्ग है जो मनुष्य को वास्तविक कल्याण और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। मनुष्य की परीक्षा इसी चुनाव में होती है।
ओशो आत्मा को शरीर और मन से परे स्थित चेतना के रूप में समझाते हैं। शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व मृत्यु से परे है। वे ध्यान, जागरूकता और भीतर की यात्रा को आत्म-साक्षात्कार का माध्यम बताते हैं।
'कठोपनिषद' का केंद्रीय संदेश है कि मृत्यु से भयभीत होने के बजाय उसके सत्य को समझना चाहिए। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब भय, मोह और अज्ञान समाप्त होने लगते हैं। ओशो की व्याख्या पाठक को बाहरी दुनिया से भीतर की ओर जाने और आत्मज्ञान के माध्यम से जीवन के परम सत्य को जानने की प्रेरणा देती है।
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