Hindu Dharma Sankriti(हिंदू धर्म संस्कृति)

हिंदू धर्म संस्कृति जगदंबा प्रसाद शुक्ल की एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों, भारतीय संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और जीवन-मूल्यों का सरल एवं सुव्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता तथा पुराणों में निहित सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षाओं को सहज भाषा में समझाया गया है। लेखक ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड तक सीमित न मानकर सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा, कर्तव्य और सदाचार पर आधारित जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया है। साथ ही भारतीय संस्कृति की प्राचीनता, सहिष्णुता, समन्वय की भावना तथा विश्वबंधुत्व के आदर्शों पर भी प्रकाश डाला गया है। पुस्तक में सोलह संस्कारों, पर्व-त्योहारों, पारिवारिक जीवन, गुरु-शिष्य परंपरा, नारी के सम्मान, प्रकृति संरक्षण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों का भी संतुलित वर्णन किया गया है। लेखक का मत है कि भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण, आत्मविकास और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। आधुनिक जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया है। हिंदू धर्म संस्कृति केवल धार्मिक विषयों की व्याख्या नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराने वाली प्रेरक कृति है। यह पाठकों को अपनी परंपराओं, नैतिक आदर्शों और मानवीय मूल्यों को समझने तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।

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ISBN : 9789393434036

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Publication: Divyansh Publication
Description:
हिंदू धर्म संस्कृति जगदंबा प्रसाद शुक्ल की एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों, भारतीय संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और जीवन-मूल्यों का सरल एवं सुव्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता तथा पुराणों में निहित सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षाओं को सहज भाषा में समझाया गया है। लेखक ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड तक सीमित न मानकर सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा, कर्तव्य और सदाचार पर आधारित जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया है। साथ ही भारतीय संस्कृति की प्राचीनता, सहिष्णुता, समन्वय की भावना तथा विश्वबंधुत्व के आदर्शों पर भी प्रकाश डाला गया है। पुस्तक में सोलह संस्कारों, पर्व-त्योहारों, पारिवारिक जीवन, गुरु-शिष्य परंपरा, नारी के सम्मान, प्रकृति संरक्षण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों का भी संतुलित वर्णन किया गया है। लेखक का मत है कि भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण, आत्मविकास और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। आधुनिक जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया है। हिंदू धर्म संस्कृति केवल धार्मिक विषयों की व्याख्या नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराने वाली प्रेरक कृति है। यह पाठकों को अपनी परंपराओं, नैतिक आदर्शों और मानवीय मूल्यों को समझने तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।

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Jagdamba Prasad Shukla

जगदम्बा प्रसाद शुक्ल पेशे से पत्रकार हैं। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से\r\nपत्रकारिता का जीवन प्रारंभ करने के बाद प्रसिद्ध अंग्रेजी दैनिक द हिंदू के\r\nसंवाददाता के रूप में लखनऊ में कार्यरत रहे। वहीं से वर्ष 2004 में सेवा\r\nनिवृत्त हुए और अब लखनऊ में रहकर स्वतंत्र लेखन का कार्य करते हैं।\r\nइसके पूर्व चाहत टाइम्स नाम से उनका एक उपन्यास प्रकाशित हो चुका है।

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