Dr Bheemrav Ambedkar Ki Aatmkatha(आंबेडकर की आत्मकथा)

आंबेडकर की आत्मकथा' डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के जीवन-संघर्ष, आत्मसम्मान, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक गाथा है। इसमें उन्होंने अपने बचपन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक के अनेक अनुभवों का वर्णन किया है। एक दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें बचपन से ही छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा। विद्यालय में उन्हें अन्य विद्यार्थियों से अलग बैठाया जाता था, पानी तक स्वयं नहीं लेने दिया जाता था और समाज में उन्हें समान अधिकार प्राप्त नहीं थे। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अथक परिश्रम के बल पर देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा सामाजिक समानता, न्याय और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें आधुनिक भारत के महान राष्ट्रनिर्माताओं में स्थान दिलाया। यह आत्मकथात्मक कृति केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मविश्वास, शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से परिवर्तन का संदेश देने वाली प्रेरक रचना है। यह पाठकों को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने, शिक्षा को अपनाने और समानता पर आधारित समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती है।

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ISBN : 9789384657208

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Publication: Divyansh Publication
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आंबेडकर की आत्मकथा' डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के जीवन-संघर्ष, आत्मसम्मान, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक गाथा है। इसमें उन्होंने अपने बचपन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक के अनेक अनुभवों का वर्णन किया है। एक दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें बचपन से ही छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा। विद्यालय में उन्हें अन्य विद्यार्थियों से अलग बैठाया जाता था, पानी तक स्वयं नहीं लेने दिया जाता था और समाज में उन्हें समान अधिकार प्राप्त नहीं थे। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अथक परिश्रम के बल पर देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा सामाजिक समानता, न्याय और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें आधुनिक भारत के महान राष्ट्रनिर्माताओं में स्थान दिलाया। यह आत्मकथात्मक कृति केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मविश्वास, शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से परिवर्तन का संदेश देने वाली प्रेरक रचना है। यह पाठकों को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने, शिक्षा को अपनाने और समानता पर आधारित समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती है।

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Dr. B. R. Ambedkar

Dr. B. R. Ambedkar (1891–1956) was a renowned Indian jurist, economist, social reformer, and the chief architect of the Constitution of India. He dedicated his life to fighting social discrimination and promoting equality, justice, and human rights, especially for the marginalized sections of society. As the first Law Minister of independent India, he played a pivotal role in shaping the nation’s democratic framework. His contributions to education, social justice, and constitutional governance continue to inspire millions. Dr. Ambedkar is widely respected as a symbol of equality, empowerment, and social transformation in India.\r\n
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